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दिवाली पर पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें, जानें घर से हटाने का सही तरीका, इन बातों का रखें ध्यान

Laxmi Ganesh Murti for Diwali: दिवाली पर पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें? जानें पुरानी मूर्तियों को दोबारा पूजा में रखने, विसर्जित करने और खंडित मूर्तियों को हटाने का सही तरीका।

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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश जी की पुरानी मूर्ति हटाएं या नहीं (AI Image)

Laxmi Ganesh Murti for Diwali: दिवाली आते ही घरों में साफ-सफाई शुरू हो जाती है। अलमारियों से लेकर पूजा घर तक हर कोना चमकाया जाता है। इसी सफाई के दौरान एक सवाल अक्सर मन में आता है। पिछले साल दिवाली पर जिन लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की पूजा की थी, उनका अब क्या करें? क्या हर साल नई मूर्तियां खरीदने के बाद पुरानी मूर्तियों को पूजा घर में रखना चाहिए? अगर जगह नहीं है तो उन्हें कहां रखें? और क्या पुरानी मूर्तियों को विसर्जित करना जरूरी है?

दरअसल, हिंदू धर्म में पूजा की मूर्तियों को केवल सजावट का सामान नहीं माना जाता। उनसे आस्था और भावनाएं जुड़ी होती हैं। इसलिए उन्हें घर से हटाते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दिवाली पर पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करना चाहिए

अगर पिछले साल की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां सही सलामत हैं और उनमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है, तो उन्हें दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है कि हर दिवाली नई मूर्तियां खरीदनी ही होंगी।

अगर आप हर साल नई मूर्तियों की स्थापना करते हैं, तो पुरानी मूर्तियों को सम्मान के साथ पूजा घर में अलग स्थान पर रख सकते हैं। इसके लिए उन्हें साफ कपड़े से पोंछकर किसी साफ जगह पर रखें। अगर पूजा घर में जगह कम है और आप पुरानी मूर्तियों को रखना नहीं चाहते, तो उन्हें किसी मंदिर में दान कर सकते हैं। ऐसा करने से पहले मंदिर के पुजारी से जरूर पूछ लें कि वे पुरानी मूर्तियां स्वीकार करते हैं या नहीं।

क्या पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का विसर्जन करना चाहिए

यह सवाल कई लोगों के मन में रहता है। खासकर तब, जब मूर्तियां मिट्टी की हों या दिवाली के लिए अस्थायी रूप से स्थापित की गई हों। अगर मूर्ति मिट्टी की है और आप उसे पूजा के बाद विसर्जित करना चाहते हैं, तो घर में किसी साफ बर्तन में पानी भरकर उसमें मूर्ति का विसर्जन कर सकते हैं। मूर्ति पूरी तरह घुलने के बाद मिट्टी को किसी गमले या पौधे की मिट्टी में मिला सकते हैं।

ध्यान रखें कि मूर्ति पर प्लास्टिक, थर्माकोल, कपड़ा या दूसरे ऐसे सजावटी सामान लगे हों जो मिट्टी में नहीं घुलते, तो उन्हें अलग कर दें। प्लास्टर ऑफ पेरिस या प्लास्टिक से बनी मूर्तियों को नदी, तालाब या किसी प्राकृतिक जलस्रोत में नहीं डालना चाहिए। इनके निपटान के लिए स्थानीय निकाय के नियमों का पालन करें।

अगर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खंडित हो जाए तो क्या करें

कई बार सफाई करते समय या पूजा के दौरान मूर्ति का कोई हिस्सा टूट जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने या इसे किसी अनहोनी का संकेत मानने की जरूरत नहीं है। खंडित मूर्ति को नियमित पूजा में इस्तेमाल करने के बजाय सम्मानपूर्वक अलग रख दें। इसके बाद अपने परिवार की परंपरा के अनुसार किसी पुजारी से सलाह लेकर उसका उचित विसर्जन या निपटान करें।

मूर्ति को कभी भी कूड़ेदान में न फेंकें। अगर मूर्ति पत्थर या धातु की है, तो उसे मंदिर में देने या किसी धार्मिक संस्था से उचित सलाह लेने का विकल्प भी है।

क्या हर दिवाली नई लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना जरूरी है

नहीं, हर साल नई मूर्ति खरीदना कोई अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। दिवाली की पूजा में सबसे ज्यादा महत्व श्रद्धा, साफ-सफाई और विधि-विधान का होता है। अगर आपके घर में पहले से स्थापित लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां अच्छी स्थिति में हैं, तो आप उन्हीं की पूजा कर सकते हैं। नई मूर्ति खरीदना आपकी इच्छा और घर की परंपरा पर निर्भर करता है।

कई परिवारों में हर साल नई मूर्तियां लाने की परंपरा है। वहीं कुछ घरों में पुरानी मूर्तियों को ही साफ करके दोबारा स्थापित किया जाता है। दोनों ही स्थितियों में अपनी पारिवारिक मान्यता का सम्मान करना चाहिए।

पुरानी मूर्तियों को हटाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • मूर्तियों को कभी भी सामान्य कचरे में न डालें।
  • खंडित मूर्तियों को पूजा की दूसरी सामग्री से अलग रखें।
  • मिट्टी की मूर्तियों का विसर्जन घर में साफ पानी से किया जा सकता है।
  • प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक की मूर्तियों को नदियों या तालाबों में न डालें।
  • पुरानी सही-सलामत मूर्तियों को दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना भी उचित है।

आखिर में एक बात समझना जरूरी है। दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की पूजा का उद्देश्य घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करना है। इसलिए पुरानी मूर्तियों को हटाने के नाम पर डरने या किसी तरह की जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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