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Chaiti Chhath Puja Geet: कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय...यहां देखें चैती छठ पर्व के गीत

Chaiti Chhath Puja Geet (चैती छठ गीत): चैती छठ का पर्व चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से लेकर सप्तमी तक मनाया जाता है। इस साल ये पर्व 1 से 4 अप्रैल तक मनाया जा रहा है। यहां आप देखेंगे चैती छठ के पावन गीत।

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Chaiti Chhath Puja Geet

Chaiti Chhath Puja Geet (चैती छठ गीत): छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है एक बार चैत्र महीने में दूसरी बार कार्तिक महीने में। अभी चैत्र महीना चल रहा है ऐसे में इस महीने में चैती छठ का त्योहार मनाया जाएगा। इस पर्व में भगवान सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस चार दिनों के महापर्व में छठी मैया के गीतों को जरूर सुना जाता है। चलिए आपको बताते हैं छठ के लोकप्रिय गीतों के बारे में।

चैती छठ पूजा गीत (Chaiti Chhath Puja Geet)

पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर,

छठी मईया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार,

भूल-चूक गलती हमार।

गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार,

छठी मईया ममता-दुलार।

पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार,

मैया दिहा सुख सार।

नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार,

साजल नदिया किनार।

सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार,

बढ़े कुल परिवार।

घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार,

मैया तोरा भगती अपार।

लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार,

दिहीं आशीष हजार।

पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर,

छठीमैया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार

भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।

Chhath Songs- केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके छठ गीत

केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके।।

के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ||

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी, हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।

अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।

के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ।।

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी, हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया के उनके लागी, से करेली छठ बरतिया के उनके लागी ।।

नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।

के करेली छठ बरतिया से झांके झुके, के करेली छठ बरतिया से झांके झुके ।।

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी, हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।

हो दीनानाथ - छठ पूजा गीत (Ho Deenanath Chhath Puja Songs)

सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ

हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार

सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ

हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार

आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ

आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार

आजू के दिनवा हो दीनानाथ

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

बाट में भेटिए गेल गे अबला

एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष

अंखिया दियेते गे अबला

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

बाट में भेटिए गेल गे अबला

एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया

बालक दियेते गे अबला

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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