वृंदावन मंदिर
Ashlesha Savant-Sandeep Baswana Wedding: टीवी इंडस्ट्री के फेमस सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' (Kyunki Saas Bhi Kabhi Bahu Thi) से शुरू हुआ दो अश्लेषा सावंत और संदीप बासवाना का प्यार 23 साल बाद अपने मुकाम पर पहुंच गया है। दोनों अब शादी के पवित्र बंधन में बंध चुके हैं। करीब 23 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने सात फेरे लेकर एक-दूसरे से सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा कर लिया है।
बीते 16 नवंबर 2025 को इस फेमस कपल ने वृंदावन के एक खास मंदिर में शादी की है। हालांकि ये शादी काफी प्राइवेट थी। इसमें सिर्फ परिवार के और बेहद ही करीबी लोग शामिल थे। कपल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शादी की तस्वीरें शेयर की हैं। 16 नवंबर 2014 को ही इस खास मंदिर की आधारशिला तत्कालीन राष्ट्रपति ने रखी थी। इस कारण शादी का यह दिन मंदिर प्रबंधन के लिए भी खास था।
वृंदावन के जिस मंदिर में इस फेमस कपल ने शादी की है, उसका नाम चंद्रोदय मंदिर है। यह मंदिर अभी निर्माणाधीन है, लेकिन यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर बनने वाला है। इस मंदिर की ऊचांई लगभग 700 फीट होगी, जो दिल्ली की कुतुबमीनार से 3 गुना ज्यादा है। इसकी नींव की गहराई दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा से भी करीब 3 गुना अधिक है।
इस मंदिर का आकार पिरामिड जैसा है और इसमें 166 मंजिलें हैं। इस मंदिर की सबसे ऊंची मंजिल से ब्रज का दर्शन किया जा सकेगा, इस कारण उसका नाम ब्रजमंडल दर्शन रखा गया है।
मंदिर के चारों ओर श्रीमद्भागवत और शास्त्रों में वर्णित 12 वन बनाए गए हैं। माना जा रहा है कि 8 रिक्टर के भूकंप को भी यह मंदिर आसानी से झेल लेगा। अगर कोई व्यक्ति इस मंदिर का पूरा भ्रमण करना चाहेगा तो उसे तीन से चार दिन तक लग सकते हैं। इस पूरे मंदिर में 511 पिलर हैं, इन पर 5 लाख टन के मंदिर का पूरा वजन रखा गया है।
चंद्रोदय मंदिर अब तक का सबसे मॉर्डन मंदिर होने की उम्मीद है। इसमें निर्माण में 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आ रही है और यह 2026 तक पूरा बनकर तैयार हो जाएगा। इसमें 4 डी तकनीक का इस्तेमाल आपको देखने को मिलेगा। इसमें देवलोक और देवलीलाओं के दर्शन भी करने को मिलेंगे। लाइब्रेरी में आप श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं को जान सकेंगे। यहां एक कृष्ण थीम पार्क भी बनाया गया है, जिसमें आप लाइट एंड साउंड शो का आनंद ले सकेंगे। इस मंदिर में 10 हजार श्रद्धालु एकबार में एकत्रित हो सकते हैं।
यह मंदिर इस्कॉन यानी अंतर्राष्ट्रीय कृष्णाभवानामृत संघ करा रहा है। बीते 16 नवंबर 2014 को तत्तकालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसकी आधारशिला को रखा था।