Saraswati Mata Ki Aarti Lyrics In Hindi, Om Jai Saraswati Mata Aarti: पुराणों में सरस्वती माता को विद्या की देवी माना गया है। इनके रूप का वर्णन शुक्लवर्ण, शुक्लाम्बरा, वीणा-पुस्तक-धारिणी तथा श्वेतपद्मासना आदि शब्दों से किया गया है। माना गया है कि ये सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्मा जी की जीभ से उत्पन्न हुई हैं। इस वजह से उनको ब्रह्म पुत्री कहा जाता है और माना गया है कि उन्होंने ही सभी जीव जंतुओं को वाणी दी है। सरस्वती को साहित्य, संगीत, कला की देवी माना जाता है। सरस्वती माता (Saraswati Mata ki aarti lyrics) का प्राकट्य दिवस माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को कहा जाता है। इसी दिन बसंत पंचमी भी आती है। यही वजह है कि बसंत पंचमी पर सरस्वती माता की पूजा का विधान है। अगर आप सरस्वती मां की पूजा करते हैं तो अंत में उनकी आरती भी जरूर गाएं। यहां आप मां सरस्वती की आरती के हिंदी लिरिक्स देख सकते हैं।
Om Jai Saraswati Mata aarti in hindi, सरस्वती माता की आरती लिरिक्स हिंदी में।
जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
देवी शरण जो आए,
उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी,
रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि,
ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का,
जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
धूप दीप फल मेवा,
माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता,
जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता...॥
माँ सरस्वती की आरती,
जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी,
ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
जय सरस्वती माता,
जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
बसंत पंचमी के अलावा नवरात्रि के सातवें दिन और श्रावण मास के बुधवार को सरस्वती माता की पूजा की जाती है। पूजा में इनकी खंडित मूर्ति न रखें और ध्यान रखें कि प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में होनी चाहिए व सौम्य मुद्रा में उनके हाथ में वीणा जरूर हो। ऐसी मूर्ति शुभ फल देने वाली मानी गई है।

