Jitiya Vrat Date, Puja Vidhi & Niyam 2026: प्रत्येक वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत रखा जाता है, जिसे जिउतिया व्रत और जीवित्पुत्रिका व्रत आदि नामों से जाना जाता है। खासकर, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, नेपाल और पश्चिम बंगाल में जितिया व्रत बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। ये व्रत माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखद जीवन के लिए रखती हैं। कुल तीन दिनों तक जितिया व्रत का अनुष्ठान चलता है, जिस दौरान राजा जीमूतवाहन और सूर्य देव की विशेष रूप से पूजा की जाती है। साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत रखने का विधान है। यदि आप भी इस साल जितिया व्रत रखने वाले हैं तो इसकी तिथि से लेकर नियमों के बारे में यहां पर जान लें।
जितिया व्रत 2026 की तिथि
- पहला दिन (सप्तमी तिथि- नहाय-खाय): 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
- दूसरा दिन (अष्टमी तिथि- मुख्य निर्जला व्रत): 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
- तीसरा दिन (नवमी तिथि- पारण): 4 अक्टूबर 2026, रविवार
जितिया व्रत की पूजा विधि
पहला दिन-
इस दिन से जितिया व्रत का आरंभ होता है। व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन प्रात: काल में स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर तैयार हो जाती हैं, जिसके बाद घर व पूजा स्थल की सफाई की जाती है। दोपहर के समय सात्विक भोजन किया जाता है, जिसमें नोनी का साग, रागी की रोटी और झिंगनी की सब्जी मुख्य रूप से खाई जाती है।
दूसरा दिन (मुख्य)-
इस दिन सूर्योदय होने के साथ ही निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है, जिससे पहले व्रत रखने वाली महिलाएं मीठा भोजन करती हैं। भोजन में दही-चूड़ा को विशेष रूप से शामिल किया जाता है। निर्जला व्रत के दौरान महिलाओं को न तो अन्न और न ही पानी पीने की इजाजत होती है। इस दिन राजा जीमूतवाहन की पूजा करने के बाद जितिया व्रत की कथा भी पढ़ी जाती है।
तीसरे दिन-
इस दिन जितिया व्रत का पारण होता है। सूर्योदय के समय सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है, जिसके बाद जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। पूजा करने के बाद नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी और तुरई की सब्जी आदि पारंपरिक व्यंजनों को खाकर व्रत का पारण किया जाता है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें- इंदिरा एकादशी के दिन करना न भूलें ये उपाय, मिल सकता है व्रत के समान फल
जितिया व्रत के नियम
तीन दिनों तक चलने वाले जितिया व्रत के दौरान व्रती महिलाओं को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना होता है। व्रत के दौरान मन के साथ-साथ तन को भी शांत रखना जरूरी है। इस दौरान किसी भी तरह के नकारात्मक विचार को मन में न आने दें। व्रत के समय गुस्सा न करें, झगड़ा न करें और न ही किसी व्यक्ति को अपशब्द बोलें। व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक निभाएं तथा किसी भी कारण से उपवास को बीच में न तोड़ें।
