Mayur Shikha Plant: मोर की शिखा जैसे दिखने वाले इस पौधे को घर में लगाने से खुल जाते हैं बंद किस्मत के ताले

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 19, 2022, 11:55 AM IST

Mayur Shikha Plant According to Vastu: मयूर शिखा के पौधे का वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व है। इस पौधे को लगाने से व्यक्ति वास्तु दोषों व बुरी नजर से छुटकारा पता है। इसके साथ ही यह पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

Mayur Shikha Plant: मोर की शिखा जैसे दिखने वाले इस पौधे को घर में लगाने से खुल जाते हैं बंद किस्मत के ताले
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Mayur Shikha Plant Benefits: घर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लोग अपने घरों के आसपास व घरों के अंदर कई तरह के पेड़ पौधे लगाते हैं। सुंदर-सुंदर पेड़ पौधे घर की शोभा तो बढ़ाते ही है, साथ में मन को भी शांति प्रदान करते हैं। पेड़ पौधे का वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व है। ऐसे कई पेड़ पौधे हैं, जिनको घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है। इन्हीं में से एक पौधा मयूर शिखा का है। मयूर शिखा का पौधा घर में लगाना बेहद शुभ माना जाता है। यह मोर की शिखा जैसा दिखाई देता है। इसलिए इसे मयूर शिखा कहते हैं। इसके अलावा इसे मोरग या पीकॉक टेल प्लांट के नाम से भी जाना जाता है। यह बहुत आसानी से मिल जाता है। यह कई रंगों में होते हैं। इसे घर में लगाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है व वास्तु दोष से भी छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के अनुसार मयूर शिखा का पौधा लगाने के क्या-क्या फायदे हैं।

दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र के अनुसार मयूर शिखा का पौधा लगाने से घर के अंदर मौजूद नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है व व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इससे घर का वातावरण भी शुद्ध रहता है और आपसी मतभेद भी दूर होते हैं।

पितृ दोष व बुरी आत्माओं से मिलता है छुटकारा

इसके अलावा मयूर शिखा का पौधा लगाने से घर में बुरी आत्माओं का प्रवेश नहीं होता है, वहीं व्यक्ति पितृ दोष से भी छुटकारा पा लेता है। मयूर शिखा का पौधा काफी लाभकारी है। इसे घर के बाहर प्रवेश द्वार के पास रख सकते हैं।

बुरी नजर से बचाता है मयूर शिखा का पौधा

वहीं अगर आपके बच्चे को बार बार किसी की बुरी नजर लग जाती है तो मयूर शिखा का पौधा लगाने से बुरी नजर से छुटकारा पाया जा सकता है। ऐसे में बच्चे के कमरे में मयूर शिखा का पौधा जरूर लगाएं।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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