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अपरा एकादशी व्रत का पारण कब और कैसे करें, यहां जानिए एकादशी व्रत की पारण विधि

Apara Ekadashi Paran Date And Time 2026 : एकादशी का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है, जब उसका पारण विधि-विधान से किया जाए। आइए जानते हैं कि अपरा एकादशी का पारण कब और कैसे करें।

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एकादशी व्रत का पारण कैसे करें

Apara Ekadashi Paran Date And Time 2026 : 13 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अपरा एकादशी का व्रत रखा गया था। सनातन धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

एकादशी व्रत में जितना महत्व उपवास और पूजा का होता है, उतना ही जरूरी उसका सही समय पर पारण करना भी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत खोलने से ही व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि 2026 में अपरा एकादशी का पारण कब करना शुभ रहेगा और इसकी सही विधि क्या है।

अपरा एकादशी पारण का शुभ समय

साल 2026 में अपरा एकादशी व्रत का पारण 14 मई, गुरुवार को किया जा रहा है। पारण का शुभ समय सुबह 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने से पहले व्रत खोलना सबसे शुभ माना जाता है। वैष्णव, सामान्य और इस्कॉन परंपरा में भी यही पारण समय मान्य माना गया है।

क्या होता है पारण?

एकादशी व्रत समाप्त करने की प्रक्रिया को पारण कहा जाता है। यानी जब भक्त उपवास पूरा करके अन्न या जल ग्रहण करता है, तो उसे पारण कहा जाता है। शास्त्रों में समय पर पारण करना जरूरी माना गया है। कहा जाता है कि अगर द्वादशी तिथि में सही समय पर पारण न किया जाए, तो व्रत का पूर्ण पुण्य नहीं मिल पाता है।

पारण से पहले क्या करें?

द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और सात्विक भोग अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद भगवान से व्रत पूर्ण होने की प्रार्थना करें।

तुलसी का जरूर करें प्रयोग

एकादशी और द्वादशी दोनों ही तिथियों में तुलसी का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। इस कारण पारण के समय तुलसी युक्त जल या चरणामृत ग्रहण करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।

कैसे करें व्रत का पारण?

व्रत खोलने के लिए सबसे पहले भगवान का चरणामृत ग्रहण करें। इसके बाद तुलसी मिला हुआ जल पी सकते हैं। फिर सात्विक भोजन से व्रत का पारण करें। पारण में फल, चावल, खिचड़ी या हल्का सात्विक भोजन ग्रहण करना अच्छा माना जाता है। कई लोग पारण में सबसे पहले गुड़ या फल भी खाते हैं।

पारण के समय किन बातों का रखें ध्यान?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण के दिन तामसिक भोजन से बचना चाहिए। लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। ज्यादा तीखा और भारी भोजन भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा क्रोध और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि द्वादशी के दिन मन और वाणी दोनों को शांत रखना शुभ होता है।

पारण के बाद करें दान (Ekadashi vrat paran ke baad kya daan kare)

अपरा एकादशी पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है। अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, तुलसी का पौधा, फल, जल से भरा घड़ा या गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कुछ मान्यताओं में इसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला व्रत भी बताया गया है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियम के साथ करता है और द्वादशी में सही समय पर पारण करता है, उसके जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारी author

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ... और देखें

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