सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा 'Belonging' की शुरुआत कैंब्रिज से होती है। साल 1965 में 19 वर्षीय सोनिया मायनो की पहली मुलाकात राजीव गांधी से होती है। उस वक्त राजीव गांधी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पोते के रूप में जाने जाते थे। यह मुलाकात आगे चलकर एक ऐसी प्रेम कहानी में बदलती है, जिसने सोनिया गांधी की पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।
इस किताब में सोनिया गांधी ने पहली बार अपने निजी जीवन, परिवार, राजीव गांधी के साथ रिश्ते और भारत से अपने जुड़ाव की कहानी को विस्तार से सामने रखा है। इटली के एक छोटे से गांव में बीते बचपन से लेकर भारत आने, भारतीय संस्कृति को अपनाने और गांधी परिवार का हिस्सा बनने तक के सफर को उन्होंने बेहद निजी अंदाज में साझा किया है।
एक के बाद एक त्रासदियों तक की कहानी इस किताब का अहम हिस्सा
आत्मकथा में सोनिया गांधी ने अपनी सास और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अपने रिश्ते का भी जिक्र किया है। राजीव गांधी के साथ जीवन, उनके बच्चों की परवरिश और प्रधानमंत्री आवास में बिताए दिनों से लेकर परिवार पर आई एक के बाद एक त्रासदियों तक की कहानी इस किताब का अहम हिस्सा है।
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संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत
संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और इसके बाद राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना-सोनिया गांधी ने इन घटनाओं को एक पत्नी, बहू और मां के नजरिए से देखा और महसूस किया। 1991 में राजीव गांधी की हत्या ने उनकी जिंदगी को एक बार फिर पूरी तरह बदल दिया।
सोनिया गांधी आखिरकार कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुईं
राजनीति में आने से लंबे समय तक इनकार करने वाली सोनिया गांधी आखिरकार कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हुईं। आगे चलकर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लंबे समय तक नेतृत्व किया और लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों का विश्वास हासिल किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया
किताब का एक सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित अध्याय 2004 का है, जब कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए को बहुमत मिला और सोनिया को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया। इसके बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया और गठबंधन सरकार का नेतृत्व पार्टी अध्यक्ष के तौर पर किया।
सोनिया गांधी की यह आत्मकथा 10 नवंबर को रिलीज होगी
‘Belonging’ सिर्फ सोनिया गांधी की राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रेम, परिवार, दुख, जिम्मेदारी और भारत को अपना घर बनाने की व्यक्तिगत कहानी भी है। सोनिया गांधी की यह आत्मकथा 10 नवंबर को रिलीज होगी, जिसके जरिए पाठकों को उनके जीवन और भारतीय राजनीति के पिछले छह दशकों को एक अलग और बेहद निजी नजरिए से देखने का मौका मिलेगा।
