Shardiya Navratri 2025: जय माता दी! आज नवरात्रि का पहला दिन है और माता रानी के स्वागत के लिए हर कोई तैयार है। वहीं, कल सूर्य ग्रहण भी था। ऐसे में आप यहां से जानें कि नवरात्रि की पूजा पर सूर्य ग्रहण का क्या प्रभाव पड़ने वाला है और पहले दिन माता के कौन से रूप की पूजा होगी। साथ ही यहां से कलश स्थापना का समय भी जान सकते हैं।
सूर्य ग्रहण का नवरात्रि पूजा पर प्रभाव-
वैसे तो कल सूर्य ग्रहण था और हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को अशुभ माना गया है। लेकिन चूंकि ये भारत में नहीं नजर आया और इसका सूतक भी मान्य नहीं था इसलिए नवरात्रि की पूजा पर सूर्य ग्रहण का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। आप शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ कर सकते हैं।
कलश स्थापना कब करें?
आज कलश स्थापना के लिए तीन शुभ मुहूर्त है। कलश स्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 06 बजकर 09 मिनट से 08 बजकर 06 मिनट तक है। वहीं, दूसरा मुहूर्त 9 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक है। इसके अलावा आप दोपहर में अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना कर सकते हैं। इसके लिए 11 बजक 49 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक शुभ मुहूर्त है।
आज कौन सी देवी की पूजा होगी?
नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री पर्वत राज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं। मां शैलपुत्री का वाहन बैल यानि की वृषभ है। इनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल है। माता को करुणा और स्नेह का प्रतीक माना गया है।
मां शैलपुत्री के मंत्र-
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
