Aaj kya hai 6 march 2026 (Aaj kaunsi sankashti ka vrat hai), aaj ki sankashti ka time (आज संकष्टी का कौनसा व्रत है): आज 6 मार्च 2026 को शुक्रवार का दिन है, हिंदू पंचांग के अनुसार आज चैत्र माह के । होलिका दहन के बाद आज रंग वाली होली खेली जाएगी। आज चैत्र मास (पूर्णिमांत) के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि सायंकाल तक रहेगी, इसके पश्चात चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। आज शाम को चतुर्थी तिथि लगेगी इसलिए आज 6 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आज कौन सी संकष्टी का व्रत है
आज 6 मार्च को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत है। इस दिन भगवान गणेश के उस स्वरूप की पूजा की जाती है, जिनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से सभी विघ्न दूर होते हैं। साथ ही साथ आज की संकष्टी का व्रत करने से संतान को उज्जवल भविष्य, सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति भी होती है।
आज की संकष्टी का टाइम क्या है
आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा, जो शुक्रवार 6 मार्च को शाम 7 बजकर 53 से प्रारंभ होगा और अगले दिन 7 मार्च को शनिवार शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस व्रत में चंद्रोदय की स्थिति को महत्व दिया जाता है
आज 6 मार्च को चंद्रोदय का समय क्या है
आज 6 मार्च वाली भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। क्योंकि भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के व्रत का पारण चंद्रमा के दर्शन के बाद ही किया जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, चन्द्रोदय शाम 9 बजकर 14 मिनट पर होगा, इस समय चंद्र दर्शन कर पूजा करने के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं।
संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
- घर में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक या लड्डू अर्पित करें।
- गणेश मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ करें।
- शाम को चंद्रमा को दीया जलाकर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
संकष्टी चतुर्थी में क्या भोग लगाएं
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन पर आप गणेश जी को मोदक, गुड़, तिल के लड्डू, नारियल और फल चढ़ा सकते हैं। ये सारी ही चीजें बप्पा को बहुत प्रिय होती हैं।
