Aaj chand kab niklega 05 April 2026 (आज चांद निकलने का समय), Moonrise time today (आज चतुर्थी का चांद कब दिखेगा): आज रविवार 05 अप्रैल 2026 को वैशाख कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी मनाई जा रही है, जिसे खास तौर पर विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। यह वैशाख महीने की गणेश चतुर्थी मानी जाती है, जिसमें भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलते हैं। इसलिए लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आज चांद कब निकलेगा और चतुर्थी का चांद किस समय दिखाई देगा। यहां जानिए विकट संकष्टी चतुर्थी पर चांद निकलने का समय और पारण कब करना चाहिए।
आज 5 अप्रैल चांद कब निकलेगा
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा रात में दिखाई देता है। खगोलीय गणनाओं के मुताबिक आज चांद लगभग रात 11:10 बजे से 11:25 बजे के बीच निकल सकता है। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में भी चंद्र दर्शन लगभग इसी समय होने की संभावना है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का खास महत्व माना जाता है, इसलिए भक्त रात तक चांद का इंतजार करते हैं।
आज 5 अप्रैल चतुर्थी का चांद कब दिखेगा
आज वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस व्रत में चंद्र दर्शन करना जरूरी माना गया है, क्योंकि चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है। यही वजह है कि लोग चतुर्थी के चांद के समय का इंतजार करते हैं।
आज 5 अप्रैल विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोलना है
संकष्टी चतुर्थी का व्रत सुबह से शुरू होकर चंद्र दर्शन के बाद पूरा होता है। जब चांद दिखाई देता है तो सबसे पहले चंद्र देव को जल या दूध अर्पित किया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा की जाती है और उनसे परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। आज रात करीब 11:10 बजे से 11:25 बजे के बीच चंद्र दर्शन करके व्रत खोला जा सकता है।
विकट संकष्टी चतुर्थी का पारण कब और कैसे करें
विकट संकष्टी चतुर्थी का पारण बहुत सरल तरीके से किया जाता है। चंद्रमा निकलने के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है और भगवान गणेश की आरती की जाती है। कई लोग इस समय गणेश मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ भी करते हैं। पूजा पूरी होने के बाद फल, पानी या हल्का सात्विक भोजन लेकर व्रत खोला जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन के कष्टों को कम करने में मदद करता है और भगवान गणेश का आशीर्वाद बनाए रखता है।
इस तरह सही समय पर चंद्र दर्शन और विधि से पूजा करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और मन को भी संतोष मिलता है।
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