अध्यात्म

4 October 2024 Panchang: पंचांग से जानिए नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा का शुभ मुहूर्त, कब से कब तक रहेगा राहुकाल

4 October 2024 Panchang: शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रम्हचारिणी जी की पूजा की जाती है। आज के दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 13 मिनट पर होगा। आइए जानें दूसरे दिन की पूजा का मुहूर्त।

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4 October 2024 Panchang

4 October 2024 Panchang (4 अक्तूबर 2024 आज का पंचांग): नवरात्रि के दिन मां ब्रम्हचारिणी जी की पूजा की जाती है। आज के दिन पूजा का अभिजीत मुहूर्त 11:52 am से 12:35 pm तक रहने वाला है। इस मुहूर्त में आप ब्रम्हचारिणी माता की पूजा कर सकते हैं। आज के दि राहुकाल का समय प्रातःकाल 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। राहुकाल में कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। अब आइए जानें आज का पूरा पंचांग।

4 October 2024 Panchang (4 अक्तूबर 2024 आज का पंचांग)

संवत-पिङ्गला विक्रम संवत 2081

माह-आश्विन शुक्ल पक्ष

तिथि- द्वितीया, व्रत- नवरात्र द्वितीय दिवस,माता ब्रम्हचारिणी जी की पूजा

दिवस-शुक्रवार

सूर्योदय-06:13am

सूर्यास्त-06:09pm

नक्षत्र-चित्रा 06'29pm तक फिर स्वाती

चन्द्र राशि -तुला राशि,स्वामी ग्रह-शुक्र

सूर्य राशि- कन्या राशि,स्वामी ग्रह -बुध

करण= बालव04:17 pm तक तत्पश्चात कौलव

योग: -वैधृति

शुभ मुहूर्त

1अभिजीत-11:52 am से 12:35 pm तक

2विजय मुहूर्त-02:22pm से 03:23 pm तक

3गोधुली मुहूर्त-06:20pm से 07:23 pm तक

4 ब्रम्ह मुहूर्त-4:04m से 05:05am तक

5अमृत काल-06:08am से 07;43am तक

6निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:41से 12:20तक रात

संध्या पूजन-06:26 pm से 07:05pm तक

दिशा शूल -पश्चिम दिशा । इस दिशा में यात्रा से बचें।दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं,यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।

अशुभ मुहूर्त

राहुकाल-प्रातःकाल 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक

क्या करें-09 दिवसीय शक्ति पूजा पर्व नवरात्रि आरम्भ है। आज द्वितीया अर्थात दूसरा दिवस है। आज माता ब्रम्हचारिणी रूप में माता दुर्गा की उपासना की जाती है। माता ब्रम्हचारिणी जी की उपासना करें। दुर्गासप्तशती का पाठ करें। माता के 32 व 108 नाम का जप करें। सिद्धिकुंजिकास्तोत्र का पाठ पुण्यदायी है। नवरात्र व्रत का पुण्य अखण्ड है,इस व्रत से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं। मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु संकल्प करके दुर्गासप्तशती का पाठ करें या कराएं। बेहतर है कि माता दुर्गा की भक्ति मांगे। यह स्थायी है। भक्ति जन्म जन्मांतर काम आती है। जो लोग आज व्रत हैं वह पूर्ण ब्रम्हचर्य का पालन करेंगे।

क्या न करें-बेटी व बेटे में कोई भी अंतर मत करें।बेटी को उच्च शिक्षा दें।

Sujeet jee Maharaj
सुजीत जी महाराजauthor

सुजीत जी महाराज ज्योतिष और वास्तु विज्ञान एक्सपर्ट हैं जिन्हें 20 वर्षों का ज्योतिष, तंत्र विज्ञान का अनुभव हासिल हैं। 25000 से ऊपर लेख देश के कई बड़े पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं और कई बड़े पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं जिसमें ,एक अमेरिका के संस्था से भी प्राप्त है। यह गणित के साथ फलित ज्योतिष पर भी पकड़ रखते हैं और ज्योतिष के क्षेत्र में इन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं।

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