अध्यात्म

Aja Ekadashi 2026: 7 या 8 सितंबर कब है अजा एकादशी? जानें क्यों खास है भाद्रपद माह की ये एकादशी

Aja Ekadashi 2026: अजा एकादशी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। साल 2026 में यह व्रत 7 या 8 सितंबर कब रखा जाएगा और इसका पारण कब होगा। जानें अजा एकादशी का धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं।

Image

अजा एकादशी कब है 2026 में

Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की उपासना और व्रत के लिए बेहद शुभ माना गया है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एक-एक एकादशी आती है और दोनों का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। इस साल अजा एकादशी की तारीख (Aja Ekadashi Date 2026) को लेकर लोगों में 7 और 8 सितंबर को लेकर असमंजस बना हुआ है। आइए जानते हैं सही तारीख, महत्व और पूजा से जुड़ी खास बातें।

7 या 8 सितंबर, कब रखा जाएगा अजा एकादशी व्रत?

पंचांग के अनुसार अजा एकादशी की तिथि 6 सितंबर 2026 की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर को दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार अजा एकादशी का व्रत सोमवार, 7 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। 8 सितंबर को व्रत का पारण किया जाएगा। इसलिए भक्तों को 8 सितंबर को एकादशी का व्रत नहीं रखना है, बल्कि इस दिन विधि-विधान से व्रत खोलना यानी पारण करना होगा।

आज एकादशी का महत्व

अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और विष्णु मंत्रों का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत मनुष्य को संयम, भक्ति और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है। व्रत के दौरान सात्विक आहार और भगवान के नाम का स्मरण करने की परंपरा है। कई भक्त इस दिन निर्जल व्रत भी रखते हैं, हालांकि अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना उचित माना जाता है।

क्यों खास है अजा एकादशी?

अजा एकादशी को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और जीवन में सकारात्मकता प्राप्त होती है। इस दिन दान-पुण्य, जप और जरूरतमंदों की सहायता को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

अजा एकादशी पर कैसे करें पूजा?

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम, विष्णु मंत्र या अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान का नाम जपें। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान माना गया है। अजा एकादशी के दिन भगवान को तुलसी दल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।

अजा एकादशी व्रत का पारण कब होगा

अजा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त 8 सितंबर 2026, मंगलवार को पारण करेंगे। पारण के समय और विधि के लिए अपने स्थानीय पंचांग में दिए गए समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा, क्योंकि स्थान के अनुसार सूर्योदय और पारण का समय थोड़ा अलग हो सकता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article