Meen Yearly Rashifal 2022 (Pisces Yearly Horoscope 2022): मीन राशि 12वीं व अंतिम राशि है। मीन का स्वामी गुरु होता है। धनु का भी स्वामी भी गुरु होता है। गुरु ज्ञान का कारक ग्रह है। गुरु विद्वता प्रदान करता है। इस राशि के जातक अत्यंत विद्वान होते हैं। गुरु विद्या तथा आत्मबल प्रदान करता है। कर्क, सिंह, मेष तथा वृश्चिक इसकी मित्र राशियां हैं। इस राशि के लोग प्रशासन की उच्च सेवा में होते हैं। इस राशि के लोग शिक्षा में बहुत बड़े पदों को सुशोभित करते हैं। इस राशि का शुभ रत्न पुखराज है।
मीन वार्षिक राशिफल 2022
1. स्वास्थ्य
स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत श्रेष्ठ वर्ष रहेगा। मार्च के बाद यह वर्ष आपको स्वास्थ्य सुख प्रदान करेगा। आपकी हेल्थ विगत वर्षों की तुलना में बेहतर रहेगी। 15 जनवरी से 16 फरवरी तक जब तक सूर्य मकर में हैं। श्वांस संबंधी रोगों सहित हृदय के रोगी सावधानी बरतें। फरवरी तक का समय बहुत बेहतर नहीं है ।
2. जॉब व व्यवसाय
व्यवसाय में फरवरी फिर नवम्बर में थोड़ी दिक्कत हो सकती है। बैंकिंग ,राजनीति,शिक्षा तथा आईटी से सम्बद्ध लोगों के लिए यह वर्ष अत्यंत श्रेयष्कर होगा। जॉब में उन्नति होगी। 15 जून के बाद का समय बहुत बेहतर है। मार्च फिर सितंबर से दिसम्बर तक जॉब चेंज या प्रोन्नति के अवसर प्राप्त होंगे। निष्कर्षतः यह वर्ष आपके कैरियर के लिए बहुत ही अच्छा रहेगा। 15 अप्रैल के बाद विदेश जाने का संयोग बनेगा। बैंकिंग व आईटी से जुड़े लोग विदेशों में सफलता पा सकते हैं।
3. लव लाइफ व दाम्पत्य जीवन
फरवरी तथा अपैल माह में लव लाइफ में थोड़ी दिक्कत रहेगी। फरवरी व मई के बाद यही प्रेम प्रसंग विवाह में बदल सकता है। दाम्पत्य जीवन में जनवरी अंत तक थोड़ा तनाव रहेगा फिर सब ठीक हो जाएगा। फिर भी लव लाइफ अपनी सफलता तक इस वर्ष पहुंचेगी। प्रेम विवाह सफल रहेगा।
4. व्यवसाय व आर्थिक स्थिति
इस वर्ष आप प्रारम्भ में 15 जनवरी से 15 फरवरी तक थोड़ा परेशान रहेंगे लेकिन मई के बाद चल तथा अचल संपत्ति खरीदेंगे। आर्थिक दृष्टि से यह वर्ष बहुत बेहतर रहेगा। यह वर्ष धन व ऐश्वर्य देगा। पूरे वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति सम्मानजनक रहेगी।
5. शुभ समय
15 मार्च के बाद सूर्य के मीन गोचर के बाद समय बहुत ही बेहतर है। सितम्बर व नवम्बर समय कुछ रुके धन की प्राप्ति से खुश रहेंगे।
6. उपाय
प्रतिदिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। धार्मिक पुस्तकों का दान करें। विष्णु भगवान के मंदिर हर गुरूवार को जाएं तथा उनकी चार परिक्रमा करें। श्री कृष्ण उपासना करें। गुरु व चन्द्रमा का उपाय करें।

