खुजली शरीर का एक तरह का अलर्ट सिस्टम है। जब त्वचा पर कोई कीड़ा, एलर्जी, सूखापन या जलन जैसी चीज होती है, तो शरीर का नर्वस सिस्टम दिमाग को संकेत भेजता है। इसी वजह से हमें खुजली महसूस होती है।
खुजली महसूस होते ही हमारा दिमाग कहता है कि उस जगह को रगड़ो या खुजलाओ। जब हम खुजलाते हैं, तो त्वचा पर हल्का दर्द या दबाव पैदा होता है। यह संकेत कुछ समय के लिए खुजली के संकेत को पीछे कर देता है।
हमारी त्वचा में बहुत सारी नसें होती हैं। खुजलाने से इन नसों पर अलग तरह का दबाव पड़ता है। दिमाग तक पहुंचने वाले ये नए संकेत कुछ समय के लिए खुजली की अनुभूति को कम कर देते हैं इसलिए खुजलाने के तुरंत बाद हमें अच्छा लगता है।
खुजलाने से त्वचा पर हल्का दर्द या जलन पैदा हो सकती है। दिमाग एक साथ आने वाले अलग-अलग संकेतों को प्रोसेस करता है और कई बार दर्द वाला संकेत खुजली के संकेत को दबा देता है। नतीजा, कुछ पल के लिए खुजली कम महसूस होती है।
यही राहत हमें बार-बार खुजलाने के लिए मजबूर कर सकती है। ज्यादा खुजलाने से त्वचा पर खरोंच, लालिमा और जलन हो सकती है। कभी-कभी त्वचा को नुकसान पहुंचने से खुजली और भी बढ़ जाती है।
पहले खुजली हुई, हमने खुजाया, थोड़ी राहत मिली, त्वचा में जलन हुई फिर खुजली बढ़ गई। इस तरह खुजली और खुजलाने का एक चक्कर बन सकता है।
अगर खुजली हल्की है तो त्वचा को जोर से खुजलाने के बजाय हल्के हाथ से दबाना, ठंडी पट्टी लगाना या त्वचा को मॉइस्चराइज करना मददगार हो सकता है। नाखून छोटे रखने से भी त्वचा पर ज्यादा खरोंच पड़ने का खतरा कम होता है।