Vrindavan Places To Visit: वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाओं की जीवंत गाथा है। यहां एक बार आने के बाद बार-बार आने का मन करता है। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु यहां बांके बिहारी जी, राधावल्लभ, राधारमण, प्रेम मंदिर और इस्कॉन जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं। कई लोग ऐसे भी हैं, जो वृंदावन की कई यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन धाम की उन पुरानी जगहों तक नहीं पहुंच पाए, जहां आज भी ब्रज की सादगी और साधना का अलग अनुभव मिलता है।वृंदावन की कुछ जगहें ऐसी हैं, जहां पहुंचते ही आधुनिक शहर की भागदौड़ पीछे छूट जाती है। कहीं आज भी बिजली का इस्तेमाल नहीं होता, कहीं सदियों पुरानी पूजा-पद्धति देखने को मिलती है तो कहीं राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ी मान्यताएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। अगर इस वीकेंड वृंदावन जाने का प्लान बना रहे हैं तो मुख्य मंदिरों के दर्शन के साथ इन जगहों को भी अपनी यात्रा में जरूर शामिल करें।
वृंदावन का राधा दामोदर मंदिर गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख मंदिरों में शामिल है। मंदिर की स्थापना 1542 ईस्वी में श्री जीव गोस्वामी से जोड़ी जाती है। यहां राधा-दामोदर जी के दर्शन होते हैं। मंदिर परिसर में वैष्णव संतों से जुड़े कई स्थल हैं। यहां गोवर्धन शिला के दर्शन और परिक्रमा की भी विशेष श्रद्धा है। मंदिर की पुरानी संरचना और परिसर में मौजूद संतों की स्मृति से जुड़े स्थान इसे वृंदावन के दूसरे मंदिरों से अलग बनाते हैं। अगर आप वृंदावन के प्राचीन मंदिरों का इतिहास देखना चाहते हैं तो राधा दामोदर मंदिर जरूर जाएं।
वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों के साथ गोपेश्वर महादेव के दर्शन भी जरूर करने चाहिए। यहां भगवान शिव को गोपेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है। ब्रज की धार्मिक कथा के अनुसार भगवान शिव रासलीला के दर्शन करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने गोपी का स्वरूप धारण किया। इसी कथा के कारण यहां शाम के समय महादेव का गोपी स्वरूप में श्रृंगार किया जाता है। मंदिर में शाम की पूजा और श्रृंगार के समय भक्तों की विशेष भीड़ रहती है। वृंदावन आएं तो इस अनोखे स्वरूप के दर्शन जरूर करें।
वृंदावन के सबसे खास धार्मिक स्थलों में निधिवन का नाम आता है। यहां चारों तरफ तुलसी के पेड़ और घने कुंज दिखाई देते हैं। परिसर में रंग महल भी है, जहां राधा-कृष्ण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां शाम के समय शैया सजाई जाती है और पानी, पान व प्रसाद रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात में यहां राधा-कृष्ण की रासलीला होती है। इसी वजह से शाम की आरती के बाद पूरा परिसर खाली करा दिया जाता है। अगर आपने अभी तक निधिवन के दर्शन नहीं किए हैं तो यहां जरूर जाएं। यहां दर्शन करने जाएं तो शाम होने से पहले पहुंचना बेहतर रहता है।
वृंदावन का टटिया स्थान अपने आप में बिल्कुल अलग अनुभव देता है। मान्यता है कि यहां कलियुग का प्रवेश आज तक नहीं हो पाया है। यहां बिजली का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। शाम ढलने के बाद परिसर में दीपक और पारंपरिक साधनों से रोशनी की जाती है। मोबाइल, बिजली और आधुनिक सुविधाओं से दूर यहां का वातावरण बेहद शांत रहता है। ततिया स्थान में राधिका मोहिनी बिहारी जी की सेवा-पूजा होती है। यहां रहने वाले साधु सादा जीवन बिताते हैं। शाम के समय होने वाला समाज गायन भी यहां की खास पहचान है। इसमें राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़े पद गाए जाते हैं। ततिया स्थान पहुंचकर आपको ऐसा महसूस होगा जैसे वृंदावन के पुराने समय में आ गए हों। अगर आप कुछ देर शहर की भागदौड़ से दूर सुकून चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं।
निधिवन के पास स्थित सेवाकुंज भी राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा धार्मिक स्थल है। यहां बड़े और भव्य मंदिरों के बजाय पेड़ों और लताओं से घिरा कुंज जैसा परिसर देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सेवाकुंज में राधा-कृष्ण की लीलाएं हुई थीं। परिसर में राधा-कृष्ण की पूजा होती है और यहां का शांत वातावरण इसे वृंदावन की दूसरी जगहों से अलग बनाता है। निधिवन के दर्शन करने जा रहे हैं तो सेवाकुंज को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं।
वृंदावन से ब्रज के दूसरे प्रमुख लीला स्थलों की ओर जा रहे हैं तो भांडीरवन को अपनी लिस्ट में जरूर रखें। यह यमुना के पास स्थित ब्रज का प्रमुख वन क्षेत्र है। ब्रज की धार्मिक मान्यता के अनुसार भांडीर वट के नीचे राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था और ब्रह्माजी ने विवाह की रस्म पूरी कराई थी। भांडीरवन में राधा-कृष्ण को दूल्हा-दुल्हन के रूप में विराजमान देखा जा सकता है। यहां भांडीर वट के अलावा वेणु कूप भी है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी से इस कूप को प्रकट किया था। फुलेरा दूज के मौके पर यहां राधा-कृष्ण विवाह उत्सव भी आयोजित किया जाता है। उस समय भांडीरवन में विशेष धार्मिक आयोजन देखने को मिलते हैं।