क्या आपने यह कभी सोचा है कि हमारा दिमाग आखिर कितनी चीजें याद रख सकता है? क्या इसकी भी कोई स्टोरेज लिमिट होती है, जैसे मोबाइल या कंप्यूटर में होती है? अगर इस बारे में आपने कभी नहीं सोचा तो आज इसका जवाब भी जान लें।
दरअसल, हमारे दिमाग को देखते हुए ही मोबाइल और कंप्यूटर के CPU और मेमोरी कार्ड्स बनाए गए हैं। भले ही आज मशीनों का जमाना आ गया है लेकिन इंसानी दिमाग मशीनों की तुलना में कहीं ज्यादा ताकतवर होता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसान का दिमाग लगभग 2.5 पेटाबाइट (Petabyte) तक जानकारी स्टोर कर सकता है। ये इतना ज्यादा स्पेस होता है कि हम इसे कभी खत्म ही नहीं कर पाएंगे।
बता दें कि 1 पेटाबाइट में 10 लाख (1 मिलियन) गीगाबाइट (GB) होता है। ऐसे में 2.5 पेटाबाइट का मतलब हुआ कि हमारे दिमाग का कुल स्पेस करीब 25 लाख GB है। यह स्पेस इतना ज्यादा है कि आप इसमें लाखों फिल्में और पूरी की पूरी लाइब्रेरी को स्टोर कर सकते हैं।
वैसे तो हम पूरा-पूरा दिन कुछ ना कुछ पढ़ते-लिखते और देखते-सुनते रहते हैं। जो कि सबकुछ हमारे दिमाग स्टोर होते रहता है लेकिन कई बार समय पर हम उसे याद नहीं कर पाते। ऐसे में दिमाग के स्टोरेज में कोई कमी नहीं है बल्कि यह कमी याद करने की क्षमता में होती है।
असल में हमारा दिमाग महत्वपूर्ण चीजों को ही याद रखता है और बाकी चीजों को वह फालतू पड़े स्टोरेज में किसी कूड़े की तरह फेंक देता है। मालूम हो कि हमारा दिमाग अरबों न्यूरॉन्स (Neurons) से बना होता है। ये न्यूरॉन्स आपस में कनेक्शन बनाते हैं और हर याद एक कनेक्शन की तरह स्टोर होती है इसलिए जो चीज हम बार-बार करते हैं, वो जल्दी याद रहती है।
अब लोगों के मन में यह सवाल आना भी लाजमी है कि क्या हमारे दिमाग की मेमोरी कभी फुल होती है? तो इसका सीधा सा जवाब यह है कि हमारे दिमाग की मेमोरी कभी फुल होती ही नहीं। उम्र, बीमारी या तनाव की वजह से भले यादें धुंधली हो जाती हैं लेकिन यह स्पेस कभी खत्म नहीं होता।