अंटार्कटिका में जब ग्लेशियर पिघलता है, तब पिघला हुआ बर्फ पानी में बदल जाता है। यह पानी बिल्कुल साफ दिखता है और ऐसा लगता है जैसे इस पानी में जरा सी भी गंदगी का नामोनिशान नहीं है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या आप इस साफ पानी को पी सकते हैं? जिसका जवाब लोगों को हैरान कर देने वाला है। आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहे हैं।
अगर आप अंटार्कटिका के ग्लेशियर से पिघले हुए पानी को पीते हैं, तब समझ लें कि आपने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दी है और इसकी कीमत आपकी जान भी हो सकती है।
भले ही अंटार्कटिका में दिखने वाला साफ पानी शीशे की तरह चमकता हो, लेकिन अगर आपने इसे पी लिया तो आपको एक बार में कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं या फिर आपकी मौत भी हो सकती है।
सच तो ये है कि ग्लेशियर का पानी सिर्फ बाहर से ही साफ दिखता है। अंदर से उस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता है। दरअसल, ग्लेशियर को बनने में लाखों साल लगते हैं और उनके अंदर प्राचीन बैक्टीरिया, फंगी और माइक्रोब्स कैद हो जाते हैं।
ये जीव इस धरती पर उस जमाने के हैं, जब हम शायद थे भी नहीं। जब ग्लेशियर्स पिघलते हैं तब ये सारे प्राचीन माइक्रोब्स सीधे उस पिघले हुए पानी में घुल जाते हैं। वैज्ञानिक भी पिघलते ग्लेशियर को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं और उनके मुताबिक अगर ग्लेशियर का पानी इंसानों तक पहुंच गया तो बहुत बड़ी त्रासदी आ सकती है।
ऐसे में ये माइक्रोब्स अगर हमारे शरीर के अंदर चले जाते हैं तो हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम उन्हें पहचान ही नहीं पाता और हमारा शरीर एक साथ कई बीमारियों का घर बन जाता है और कुछ ही दिनों में हमारी मौत भी हो सकती है।