रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की खुशहाली की कामना का पर्व है। ऐसे में इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए भाई-बहन साथ में किसी पवित्र स्थल के दर्शन भी कर सकते हैं। देश में कुछ ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल हैं, जिनका संबंध ही भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं इनके बारे में।
मथुरा के विश्राम घाट के पास स्थित यमुना-धर्मराज मंदिर भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा अनोखा धार्मिक स्थल है। यहां मां यमुना और उनके भाई धर्मराज यानी यमराज की पूजा होती है। मान्यता है कि रक्षाबंधन या भाई दूज पर भाई-बहन यहां साथ में यमुना स्नान और दर्शन करें तो पापों से मुक्ति और भाई की दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है।
बिहार के सिवान जिले के भीखाबांध गांव में स्थित भैया-बहिनी मंदिर करीब 500 साल पुराना बताया जाता है। यहां किसी देवी-देवता की मूर्ति के बजाय आपस में जुड़े दो विशाल बरगद के पेड़ों की पूजा होती है। इन्हें एक भाई-बहन की स्मृति से जोड़ा जाता है। रक्षाबंधन पर यहां विशेष मेला भी लगता है।
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। यहां भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। तीनों की एक साथ पूजा और रथ यात्रा इस रिश्ते की अनूठी धार्मिक परंपरा को दर्शाती है।
उत्तराखंड के खरसाली गांव में स्थित यह मंदिर भगवान शनिदेव और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। सर्दियों में यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने पर मां यमुना की उत्सव मूर्ति को खरसाली लाया जाता है, जहां वह अपने भाई शनिदेव के साथ विराजमान रहती हैं।
चमोली का बंसी नारायण मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता के अनुसार इसके कपाट साल में केवल रक्षाबंधन के दिन खुलते हैं। इस दिन बहनें भगवान नारायण को राखी अर्पित कर भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
रक्षाबंधन पर इन धार्मिक स्थलों की यात्रा भाई-बहन के रिश्ते को एक खूबसूरत आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ सकती है। हालांकि, यहां बताई गई मान्यताएं धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं।