Car Loan and EMI Option : नई कार खरीदते समय सबसे पहले नजर जाती है उसकी कीमत और फिर EMI पर। यही वह जगह है जहां कई खरीदार गलती कर बैठते हैं। बैंक या फाइनेंस कंपनी अगर कम EMI दिखा दे, तो कार बजट में आसानी से फिट होती नजर आती है, लेकिन इस कम EMI के पीछे लोन की लंबी अवधि छिपी होती है। यानी हर महीने जेब से कम पैसा जाएगा, लेकिन कई साल तक भुगतान करना होगा और आखिर में ब्याज के रूप में काफी ज्यादा रकम निकलती है। यही वजह है कि कार लोन का फैसला सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि हर महीने कितनी EMI देनी है? असली सवाल यह है कि कार के लिए कुल कितना पैसा चुकाना पड़ेगा और कितने समय तक कर्ज सिर पर रहेगा।
लंबी EMI का पहला नुकसान- ज्यादा ब्याज
मान लीजिए आपने 10 लाख रुपये का कार लोन 9 फीसदी की सालाना ब्याज दर पर लिया। यह सिर्फ समझाने के लिए एक उदाहरण है; वास्तविक दर बैंक, आपकी क्रेडिट प्रोफाइल और लोन की शर्तों पर निर्भर करेगी। अगर यही 10 लाख रुपये का लोन 3 साल के लिए लिया जाए तो EMI करीब 31,800 रुपये होगी। तीन साल में कुल भुगतान करीब 11.45 लाख रुपये बैठेगा, यानी ब्याज करीब 1.45 लाख रुपये। अब यही लोन 5 साल के लिए लें तो EMI घटकर करीब 20,800 रुपये रह जाती है। देखने में यह काफी राहत देने वाली रकम है। लेकिन पांच साल में कुल भुगतान करीब 12.46 लाख रुपये होगा और ब्याज करीब 2.46 लाख रुपये पहुंच जाएगा। सात साल की अवधि में EMI करीब 16,100 रुपये तक आ सकती है। लेकिन कुल भुगतान करीब 13.51 लाख रुपये और ब्याज करीब 3.51 लाख रुपये हो जाएगा।
घटती EMI , बढ़ता ब्याज
इस उदाहरण में 3 साल की जगह 7 साल का लोन लेने पर EMI करीब 15,700 रुपये कम हो जाती है, लेकिन कुल ब्याज करीब 2.07 लाख रुपये ज्यादा चुकाना पड़ता है।
| लोन अवधि | हर महीने EMI | कुल भुगतान | कुल ब्याज |
|---|---|---|---|
| 3 साल | ₹31,800 | ₹11.45 लाख | ₹1.45 लाख |
| 5 साल | ₹20,800 | ₹12.46 लाख | ₹2.46 लाख |
| 7 साल | ₹16,100 | ₹13.51 लाख | ₹3.51 लाख |
दूसरा नुकसान कार की घटती कीमत
कार कोई ऐसी संपत्ति नहीं है, जिसकी कीमत समय के साथ लगातार बढ़ती जाए। आम तौर पर कार की रीसेल वैल्यू उम्र, मॉडल, किलोमीटर, हालत और बाजार की मांग के साथ घटती जाती है। यहीं लंबी अवधि का कार लोन दूसरी समस्या पैदा करता है। मान लीजिए आपने नई कार खरीदने के बाद सात साल का लोन लिया। कुछ साल बाद कार की कीमत काफी कम हो चुकी होगी, लेकिन आपका लोन अभी भी चल रहा हो सकता है। यानी जिस चीज की कीमत लगातार घट रही है, उसके लिए आप लगातार EMI चुका रहे हैं।
रीसेल में समझ आती है मुश्किल
लंबे लोन की असल मुश्किल तब आती है, जब आपको उस कार को बेचना होता है। मान लीजिए तीसरे या चौथे साल में आप कार बेचकर नई कार लेना चाहते हैं। तब आपको पहले यह देखना होगा कि पुराने लोन में कितना बकाया बचा है और कार की बाजार कीमत कितनी है। अक्सर ऐसे मामलों में कार का लोन कार की बाजार कीमत से ज्यादा बकाया रहता है, जिसके चलते कार को बेचने पर हाथ में या तो कुछ भी नहीं आता है, या फिर बहुत ही कम रकम मिलती है। अगर कार बेचने की कीमत लोन की बकाया रकम से कम रहती है, तो बेचने से पहले लोन बंद करने के लिए आपको अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा भी लगाना पड़ता है। यही वजह है कि बहुत लंबी अवधि का लोन डबल घाटे का सौदा बन सकता है।
क्या है सबसे अच्छा तरीका?
कार खरीदने वाले लोग अक्सर शोरूम या ऑनलाइन कैलकुलेटर पर तीन आंकड़े देखते हैं। डाउन पेमेंट, ब्याज दर और EMI। लेकिन चौथा और सबसे जरूरी आंकड़ा होता है कुल भुगतान। सामान्य तौर पर सबसे अच्छा तरीका तो यही है कि न्यूनतम अवधि की EMI के साथ कार खरीदें। लेकिन, लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए अगर EMI छोटी रखनी है, तो लगातार बचत करें और बीच-बीच में पार्ट पेमेंट जरूर करें। इसके अलावा जब लोन लें, तो फोरक्लोजर और पार्ट पेमेंट से जुड़ी शर्तों पर बैंक से बात जरूर करें। ऐसे बैंक से ही लोन लें, जो ये दोनों सुविधाएं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क और भुगतान के देता है।
