वेटिंग लिस्ट के बारे में आपको यह समझना होगा कि हर वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की संभावना एक जैसी नहीं होती। रेलवे अलग-अलग श्रेणियों में वेटिंग लिस्ट जारी करता है और प्रत्येक की प्राथमिकता अलग होती है। आज की इस रिपोर्ट में हम यही समझेंगे कि किस प्रकार की वेटिंग टिकट सबसे पहले कंफर्म होती है और किसकी संभावना सबसे कम रहती है।
रेलवे में GNWL यानी जनरल वेटिंग लिस्ट को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। यह टिकट बड़े स्टेशनों से यात्रा शुरू करने वाले यात्रियों के लिए जारी किया जाता है। इस श्रेणी के टिकट के कंफर्म होने की संभावना लगभग 80 से 90 प्रतिशत तक मानी जाती है। यही वजह है कि अधिकतर यात्री GNWL टिकट को सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
RAC यानी Reservation Against Cancellation टिकट भी यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें यात्रियों को यात्रा के दौरान आधी सीट मिल जाती है और बाद में सीट फुल कंफर्म होने की संभावना बनी रहती है। RAC टिकट के पूरी तरह कन्फर्म होने की संभावना करीब 60 से 80 प्रतिशत तक मानी जाती है।
RLWL यानी Remote Location Waiting List उन यात्रियों के लिए होती है जो बीच के स्टेशनों से यात्रा करते हैं। इसकी कंफर्म होने की संभावना लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक रहती है। वहीं PQWL यानी Pooled Quota Waiting List छोटी दूरी के यात्रियों के लिए जारी की जाती है और इसकी संभावना करीब 20 से 30 प्रतिशत तक मानी जाती है।
RSWL यानी Road Side Waiting List शुरुआती स्टेशन के पास यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए होती है। इसमें टिकट कंफर्म होने की संभावना केवल 10 से 20 प्रतिशत तक रहती है।
वहीं TQWL यानी तत्काल वेटिंग लिस्ट सबसे कम प्राथमिकता वाली श्रेणी मानी जाती है। इसमें टिकट कंफर्म होने की संभावना 0 से 10 प्रतिशत तक ही होती है।
टिकट बुक करते समय वेटिंग लिस्ट के प्रकार को समझना बेहद जरूरी है। सही श्रेणी की जानकारी होने से यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने में आसानी होती है।
कंफर्म टिकट मिलने की संभावना का भी सही अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि आपको GNWL नजर आ रहा है तो आपको टिकट ले लेना चाहिए, क्योंकि इसके कंफर्म होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।