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Ground Report: पटना से महज 15 किमी दूर उफनती पुनपुन का तांडव, कमर भर पानी में डूबकर मदद की राह देख रहा गांव

Patna Flood Ground Report: पटना के फतुहा विधानसभा स्थित सुकुलपुर गांव में पुनपुन नदी के उफान से 8000 की आबादी बाढ़ में घिरी है। घर-दुकान और स्कूल डूबे हैं, चूल्हा बंद है और लोग मगरमच्छ व सांपों के खौफ में सरकारी मदद की आस लगाए हैं।

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4-5 दिनों से बाढ़ग्रस्त है इलाका

Photo : Times Now Digital

Patna Flood Ground Report: बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी के रौद्र रूप ने उसकी सहायक पुनपुन नदी को भी उफान पर ला दिया है। राजधानी मुख्यालय से महज 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित फतुहा विधानसभा क्षेत्र की जेटली पंचायत का सुकुलपुर गांव इस समय पूरी तरह जलमग्न है। लगभग 8,000 की आबादी वाला यह गांव चारों तरफ से पुनपुन नदी के तेज बहाव में घिरा हुआ है।

घरों के भीतर कमर से लेकर गर्दन तक पानी भरा हुआ है। स्कूल, सड़कें, पीने के पानी के नल और आशियाने सब जलमग्न हैं। लेकिन इस भीषण त्रासदी के बीच ग्रामीणों को जो बात सबसे ज्यादा चुभ रही है, वह है प्रशासन की अनदेखी। राजधानी के इतने करीब होने के बावजूद अब तक न तो यहां सरकारी नाव पहुंची है, न ही भूखे पेट मिटाने के लिए कोई कम्युनिटी किचन शुरू हुआ है और ना ही कोई और मदद मिली है।

जहरीले सांप और मगरमच्छों का खौफ

सुकुलपुर गांव समेत पूरे इलाके में चारों तरफ केवल पानी ही पानी नजर आता है। गांव के रास्तों पर लोग कमर भर पानी में चलने को मजबूर हैं, तो कई जगहों पर पानी इंसानों की गर्दन तक पहुंच चुका है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाढ़ के इस गंदे पानी में केवल बीमारी का ही डर नहीं है, बल्कि जान का सीधा खतरा मंडरा रहा है। पानी में विषैले सांप और बिच्छू तो लगातार तैर रहे हैं, हाल ही में ग्रामीणों ने गांव के भीतर पानी में दो मगरमच्छों को भी देखा है।

डूबे हुए सरकारी स्कूल और लाचार व्यवस्था

गांव का सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। कक्षा के कमरों से लेकर मैदान तक पानी भरा है। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर इस विकट परिस्थिति में कोई बुजुर्ग, गर्भवती महिला या बच्चा बीमार पड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक ले जाने के लिए गांव में एक सरकारी नाव तक उपलब्ध नहीं है। न ही कोई मेडिकल टीम दवाओं का छिड़काव करने या स्वास्थ्य जांच के लिए गांव में आई है। लोग अपने स्तर पर जैसे-जैसे जान बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

डूबा चूल्हा, छतों और पड़ोसियों के घर शरण लेने को मजबूर लोग

बाढ़ से सबसे ज्यादा त्रस्त घर की महिलाएं हैं। डूबे हुए मकानों के भीतर रसोई का चूल्हा और गैस सिलेंडर पानी में समा चुके हैं। घर का राशन और जरूरी सामान खराब होने से बचाने के लिए चारपाई और बेड के ऊपर लादकर रखा गया है।

एक महिला ग्रामीण ने लगभग रोते हुए अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि "हमारे मवेशी पानी के तेज बहाव में खुलकर बह गए। घरों में पानी भर गया है, हम पड़ोसियों के ऊंचे पक्के मकानों की छतों पर शरण लेकर रह रहे हैं। सरकार की तरफ से एक दाना तक नहीं आया है।"

एक और ग्रामीण ने कहा कि 4 दिनों से मवेशियों को केवल पानी पिलाकर किसी तरह जिंदा रखे हुए हैं। न चारे का ठिकाना है, न राशन का।

राजधानी से सटे गांव का यह हाल क्यों?

सुकुलपुर गांव के लोगों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि बिहार की प्रशासनिक मशीनरी का केंद्र पटना मुख्यालय यहां से सिर्फ 10-15 किलोमीटर दूर है, फिर भी सरकार का कोई नुमाइंदा उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा। खेती पूरी तरह डूब चुकी है और पशुपालकों के सामने अपने बचे हुए जानवरों को बचाने की गंभीर चुनौती है। गांव वाले अब भी टकटकी लगाए रास्तों को निहार रहे हैं कि कब प्रशासन की तरफ से राहत सामग्री, सूखा राशन, कम्युनिटी किचन और सुरक्षित आवाजाही के लिए नावें भेजी जाएंगी। सुकुलपुर के लोग कुदरत के इस कहर और तंत्र की बेरुखी के बीच कमर भर पानी में डूबे अपनी जिंदगी और आशियाने को बचाने की हरसंभव लड़ाई लड़ रहे हैं।

(पटना से गौतम की रिपोर्ट)

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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