रोमांच की चाह अगर आप घूमने के लिए मजबूर करती है तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है। आज हम आपको जिस ट्रैवल डेस्टिनेशन के बारे में बताने जा रहे हैं वहां आपको प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यात्मक अनुभव का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।
आज हम जानेंगे मंगलाछु ताल के बारे में डिटेल में जानकारी जो रहस्यमयी होने के साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां कुछ ऐसा होता है जो स्थानीय विश्वासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस ताल का दिलचस्प पहलू जो इसे अनूठा बनाती है वह यह है कि ताल के किनारे खड़े होकर ताली बजाने, सीटी मारने या हल्की आवाज करने पर ताल के पानी में बुलबुले उठने लगते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इसके पीछे देवी-देवताओं की शक्ति है। वहीं कुछ वैज्ञानिक इसे भूमिगत गैस रिसाव या छोटे भूकंपीय हलचलों से जोड़कर देखते हैं।
इस ताल को सोमेश्वर देवता का ताल भी कहा जाता है। मान्यता है कि स्थानीय लोग कुल्लू से सोमेश्वर देवता की डोली को लेकर यहीं आए थे। इसके अलावा जब बारिश नहीं होती, तो लोग पूजा अर्चना करने इसी ताल के पास आते हैं।
इसके निकटतम रेलवे स्टेशन: उत्तरकाशी (लगभग 80 किमी दूर) है। डायरेक्ट यहां पहुंचने का कोई विकल्प नहीं है। यहां पहुंचने के लिए मुखबा गांव से 6 किलोमीटर की ट्रैकिंग करनी होती है।
फूलों से सजी घाटियों और बुग्यालों से होकर गुजरता ट्रैक आपकी यात्रा को मंत्रमुग्ध कर देगा। ट्रैक का पहला पड़ाव नागणी नामक खूबसूरत बुग्याल है।