Aug 24, 2026

कोलकाता पर शायरी: ख्वाब आंसू एहतजाजी जिंदगी, ना पूछिए शहर-ए-कलकत्ता है क्या

Suneet Singh

​ कलकत्ता के हसीनों को जब देख लेता हूं, उस वक्त दिल में होता है सौदा-ए-लखनऊ​

- वाजिद अली शाह अख़्तर

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​महरूम हूं मैं खिदमत-ए-उस्ताद से 'मुनीर'कलकत्ता मुझ को गोर से भी तंग हो गया​



​- मुनीर शिकोहाबादी


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​दिल पुणे से मुंबई तक भी जाए तोरस्ते में दिल्ली कलकत्ता होता है​



​- ओम भुतकर मग्लूब


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​​सिसकती आरज़ू का दर्द हूँ फ़ुटपाथ जैसा हूं, ​कि मुझ में छटपटाता शहर-ए-कलकत्ता भी रहता है​​



- खुर्शीद अकबर

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​​सू-ए-कलकत्ता जो हम ब-दिल-ए-दीवाना चले, गुनगुनाते हुए इक शोख़ का अफ़्साना चले​​



- अख़्तर शीरानी

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​​कलकत्ता से भी कीजिए हासिल कोई तो इल्म, सीखेंगे सेहर-ए-सामरी हम चश्म-ए-यार से​​


- अब्दुल्ल्ला ख़ां महर लखनवी

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​​ला-मकां है वास्ते उन की मक़ाम-ए-बूद-ओ-बाश, ​गो ब-ज़ाहिर कहने को कलकत्ता और लाहौर है​​


- शाह आसिम

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​​कलकत्ता में हर दम है 'मुनीर' आप को वहशत, हर कोठी में हर बंगले में जंगला नज़र आया​​



- मुनीर शिकोहाबादी

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​ख्वाब आंसू एहतजाजी जिंदगी, ना पूछिए शहर-ए-कलकत्ता है क्या​

- अम्बर समीम

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