आज हम कोई छोटा मोटा काम करके वापस आते हैं तो उसे दूसरों को सुनाते फिरते हैं। जब हनुमान जी माता सीता की खोज करके और लंका का दहन करके वापस आते हैं तो भगवान के पूछने पर भी अपने पराक्रम का कोई किस्सा नहीं सुनाते हैं।
राम रावण युद्ध के समय जब लक्ष्मण जी को शक्ति लग जाती है तो लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। बूटी की पहचान ना कर पाने की स्थिति में वह पूरा पहाड़ ही उठा लाते हैं। इस प्रसंग से हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि हमें हमेशा शंका को छोड़ते हुए समाधान की ओर बढ़ना चाहिए।
अक्सर हम अपने ज्ञान और प्रतिभा का बेवजह प्रदर्शन करने लग जाते हैं। हनुमान चालीसा में लिखा है— “सूक्ष्म रूप धरी सियंही दिखावा, विकट रूप धरी लंक जरावा”। हनुमान जी आवश्यकता के अनुरूप ही अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं।
श्री रामचरितमानस के उत्तरकांड का प्रसंग है— “कपि के वचन सप्रेम सुनि, उपजा मन बिस्वास। जाना मन क्रम वचन यह, कृपासिंधु कर दास”।। जब हनुमान जी माता सीता से ‘अशोक वाटिका’ में मिलते हैं तो सीता जी उन्हें पहचान नहीं पाती हैं। वानर रूप में भगवान के दूत को देखकर सीता जी को बिस्वास नहीं होता है तब हनुमान जी अपने ‘संवाद कौशल’ से माता को भरोसा दिलाते हैं कि वे ही भगवान के दूत हैं।
सुंदरकांड का प्रसंग है— जब हनुमान जी लंका जाने के लिए समुद्र पार कर रहे थे तो रास्ते में हनुमान जी को सुरसा नाम की राक्षसी ने खाने का प्रयास किया। तब हनुमान जी ने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए पहले तो अपने रूप को बहुत बड़ा किया और फिर उससे बचने के लिए बहुत छोटा रूप लेकर उसके पेट में गए और फिर पेट से बाहर आ गए।
भगवान राम के जीवन की जब बात आती है तो रामायण का जिक्र किया जाना स्वाभाविक है या ऐसा भी कहा जा सकता है कि राम के अनन्य भक्त हनुमान रामायण के सबसे महत्वपूर्ण किरदार हैं।
आप हनुमान जी से अपने जीवन के लिए वो गुण सीख सकते हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने जीवन में एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण परिवर्तन कर सकते हैं।