मिशन इंजीनियरों ने कम ऊर्जा उपलब्ध होने की वजह से वॉयजर-2 के प्लाज्मा साइंस या PLS एक्सपेरिमेंट को बंद करने का एक कमांड भेजा है। इस उपकरण की मदद से सौर हवाओं का निरीक्षण किया जाता था। (फोटो साभार: NASA)
47 साल पुराना वॉयेजर 2 सुदूर अंतरिक्ष में 15 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से फर्राटा भर रहा है और वर्तमान में स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी से 20.9 अरब किमी दूर है। (फोटो साभार: NASA)
वॉयेजर 2 तक कमांड पहुंचने में 19 घंटे का समय लगा और वापसी सिग्नल 19 घंटे बाद मिला। 47 साल पुराने स्पेसक्राफ्ट को प्लूटोनियम से ऊर्जा मिलती है। (फोटो साभार: copilot AI)
बकौल नासा, पिछले कई सालों में मिशन इंजीनियरों ने यथासंभव लंबे समय तक किसी भी उपकरण को बंद नहीं करने का फैसला किया है, क्योंकि वॉयेजर 1 और वॉयेजर 2 दोनों से ही दुर्लभ डेटा मिल रहा है। (फोटो साभार: copilot AI)
1977 में लॉन्च किए गए वॉयेजर स्पेसक्राफ्ट सुदूर अंतरिक्ष में भ्रमण कर रहे हैं और इनके नाम एक खास तरह की उपलब्धि भी दर्ज है। बता दें कि वॉयेजर हेलियोस्फीयर के बाहरी क्षेत्र तक पहुंचने वाला पहला स्पेसक्राफ्ट है। (फोटो साभार: copilot AI)
वॉयेजर 2 का PLS एक्सपेरिमेंट बंद करने का कमांड भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त चार अन्य उपकरण हमारे हेलियोस्फीयर के बाहरी क्षेत्र का अध्ययन कर रहे हैं। उम्मीद है कि 2030 तक एक उपकरण के इस्तेमाल की ऊर्जा शेष रहेगी। (फोटो साभार: copilot AI)