पक्षियों की बुद्धिमत्ता को मापने के लिए वैज्ञानिक किसी एक तरीके पर निर्भर नहीं है। इसके लिए रिसर्चर द्वारा कई तरह के व्यवहारों और दिमागी क्षमताओं का अध्ययन करते हैं। मुख्य रूप से पांच पैमानों पर इनकी समझ को आंका जाता है। जिसमें पहला है सामाजिक जटिलता, समस्या सुलझाना, औजारों का उपयोग, सीखना व नकल, याददाश्यत। लेकिन इन पैमानों के अनुसार, दुनिया के 5 सबसे बुद्धिमान पक्षियों के बारे में जानते हैं।
मध्य और पश्चिम अफ्रीका में पाया जाने वाला 'अफ्रिकन ग्रे तोता' बुद्धिमत्ता के मामले में सबसे ऊपर है। इसकी भाषाई और सामाजिक समझ इतनी लाजवाब होती है कि यह इंसानों के सैकड़ों शब्दों को सिर्फ रटता नहीं, बल्कि उनके सही संदर्भ और भावनाओं को समझकर इस्तेमाल भी करता है। यह तोता शब्दों को अलग-अलग वस्तुओं, रंगों और मात्राओं से जोड़ने में पूरी तरह से सक्षम है। तर्क के आधार पर समस्याओं को सुलझाने की इसकी यह क्षमता इसे दिमागी टेस्ट में एक छोटे इंसानी बच्चे के बराबर लाकर खड़ा कर देती है।
न्यू कैलेडोनियन द्वीप पर पाए जाने वाले कौवे जानवरों की दुनिया में अपने तकनीकी कौशल के लिए जाने जाते हैं। जहां औजारों का निर्माण केवल बंदर और चिंपैंजी की विशेषता माना जाता था, वहीं ये कौवे पेड़ की टहनियों और पत्तों को मोड़कर बाकायदा 'हुक' तैयार कर लेते हैं। ये भोजन निकालने के लिए कई चरणों वाली गणना कर सकते हैं और कारण-प्रभाव के संबंध को अच्छी तरह समझते हैं। इनका यही हुनर इन्हें जीवों की श्रेणी में एक महान इंजीनियर बनाता है और इनकी समझदारी को दिखाता है।
न्यूजीलैंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाने वाला 'किया' तोता दुनिया के सबसे बुद्धिमान पक्षियों की श्रेणी में शामिल है। यह अपनी अत्यधिक जिज्ञासा और किसी भी माहौल में ढलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसे पक्षी जगत का 'जीनियस' कहा जाता है क्योंकि यह बेहद पेचीदा और कई चरणों वाली पहेलियों को चुटकियों में सुलझा लेता है। किया तोते किसी भी नई चीज को देखकर घबराते नहीं हैं, बल्कि उसका रचनात्मक रूप से इस्तेमाल करना सीखते हैं।
यूरोप और एशिया के आसमान में उड़ने वाली यूरोपियन मैगपाई ने विज्ञान जगत को सबसे अधिक हैरान किया जब इसने मिरर टेस्ट को पास किया। एक पक्षी के तौर पर इस टेस्ट को पास करना बहुत बड़ी बात है। यह उन बहुत कम जीवों में शामिल है, जिन्होंने शीशे के सामने खड़े होकर यह समझा की सामने दिखने वाला अक्स उन्हीं का है। अपनी इस आत्म-जागरूकता के अलावा, यह पक्षी बेहतरीन याददाश्त का मालिक होता है और अपने समूह के सदस्यों की सामाजिक पहचान रखने में माहिर माना जाता है।
पूरी दुनिया में पाए जाने वाले कबूतरों को अक्सर लोग बहुत साधारण पक्षी समझते हैं, लेकिन इनकी विजुअल लर्निंग अद्भुत होती है। कबूतर इंसानी चेहरों को पहचान सकते हैं, वर्णमाला के अक्षरों में अंतर कर सकते हैं और यहां तक कि अमूर्त पैटर्न्स को भी समझ सकता है। इनकी इसी बेहतरीन याददाश्त और दिशाओं की सटीक समझ के कारण इतिहास में इनका उपयोग संदेशवाहक के रूप में किया जाता रहा है।
इन तमाम वैज्ञानिक शोधों से एक बात पूरी तरह से साफ हो चुकी है कि आकार में बेहद छोटे होने के बावजूद पक्षियों का दिमाग जटिल सोच के मामले में बंदरों और चिंपैंजी को तक कड़ी टक्कर दे सकता है। चाहे वह कौवे की प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल की समझ हो या अफ्रीकन ग्रे तोते की भावनात्मक बुद्धिमत्ता, यह इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति ने पंखों वाले इन जीवों को एक अनोखा दिमाग दिया है।