दुनिया में कई प्रकार की खनिज है, लेकिन जिस खनिज को दबी हुई धूप के नाम से जाना जाता है वह है 'कोयला।' जी हां, आपको लग रहा होगा की कोयला दबी हुई धूप कैसे है, क्योंकि इसे तो काला सोना कहा जाता है न। तो क्या है इसकी वजह।
कोयला एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इसे 'दबी हुई धूप' या 'दफन धूप' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके भीतर जो ऊर्जा छिपी है, वह वास्तव में करोड़ों साल पहले की सूरज की धूप ही है। यह धूप पेड़-पौधों के माध्यम से जमीन के नीचे दब गई थी, जो आज हमें कोयले के रूप में मिलती है।
करोड़ों साल पहले धरती पर घने जंगल हुआ करते थे। इन पेड़-पौधों ने सजीव रहते हुए सूर्य के प्रकाश से प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया के जरिए सौर ऊर्जा को अपने अंदर सटोर किया करते था। जब ये पौधे मृत होकर जमीन के अंदर गहरे दब गए, तो सूर्य की वही ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में इनके अंदर लॉक हो गई। इसी वजह से वैज्ञानिक इसे 'दबी हुई धूप' कहते हैं।
कोयले के बनने की प्रक्रिया बेहद लंबी है। इसमें पौधे दफन होते हैं। सुनकर अजीब लगा न, लेकिन दलदली इलाकों में पौधों के मरने के बाद वे मिट्टी और पानी के नीचे दबते चले गए। समय के साथ इन पर मिट्टी और गाद की परतें जमा होती जाती है। उसके बाद जमीन की गहराइयों में ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक दबाव और तेज गर्मी के कारण ये मृत पौधे धीरे-धीरे कोयले में बदल जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को कार्बोनाइजेशन कहा जाता है।
कार्बन की मात्रा और शुद्धता के आधार पर कोयले को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा जाता है। इसमें पहला एंथ्रेसाइट है, यह सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला है, जिसमें 80-95% तक कार्बन होता है। दूसरा बिटुमिनस- यह सबसे आम कोयला है, जिसका उपयोग बिजली बनाने और उद्योगों में सबसे ज्यादा होता है। तीसरा है लिग्नाइट - इसे 'भूरा कोयला' भी कहते हैं। इसमें नमी ज्यादा और कार्बन की मात्रा कम होती है। वहीं कोयले का चौथा प्रकार पीट है, जो कोयला बनने की शुरुआती अवस्था है, इसमें कार्बन की मात्रा सबसे कम होती है।
भले ही आज दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ रही है, लेकिन आज भी दुनिया की एक बड़ी आबादी बिजली के लिए कोयले पर ही निर्भर करती है। थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले को जलाकर पानी से भाप बनाई जाती है, जिससे टरबाइन घूमते हैं और बिजली पैदा होती है।
जैसा हमने शुरुआत में बताया कि कोयले को 'दबी हुई धूप' के अलावा 'काला सोना' भी कहा जाता है। इसके पीछे की वजह इसका अत्यधिक औद्योगिक और आर्थिक मूल्य है। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति देने और उद्योगों को चलाने में कोयले का योगदान सोने जितना ही कीमती माना जाता है, इसलिए इसे यह नाम मिला है।