नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को पश्चिमी अमेरिका में बर्फ का कवरेज केवल 1,42,700 वर्ग मील दर्ज किया गया। यह साल 2001 में MODIS रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे कम स्तर है। यह सामान्य औसत के एक-तिहाई से भी कम है, जो बताता है कि सर्दियों की सफेदी कितनी तेजी से गायब हो रही है।
इस सूखे की सबसे अजीब बात यह है कि पश्चिमी अमेरिका में नमी (Precipitation) की कमी नहीं रही। पतझड़ और शुरुआती सर्दियों में औसत से अधिक बारिश हुई, लेकिन रिकॉर्ड तोड़ तापमान के कारण वह नमी बर्फ बनने के बजाय बारिश के रूप में बरसी। इसे वैज्ञानिक शब्दावली में 'वार्म प्रेसिपिटेशन' कहा जाता है, जहां आसमान से पानी तो गिरता है, पर वह पहाड़ों पर जमने के बजाय सीधे बह जाता है।
वैज्ञानिकों के लिए बर्फ की ऊंचाई से ज्यादा महत्वपूर्ण SWE (Snow Water Equivalent) है, जो यह मापता है कि बर्फ के भीतर पानी की मात्रा कितनी है। नेशनल इंटीग्रेटेड ड्राउट इंफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार, वाशिंगटन, ओरेगन, और कोलोराडो जैसे राज्यों में SWE का स्तर 20वीं पर्सेंटाइल से भी नीचे गिर गया है। कई प्रमुख जलक्षेत्रों ने पिछले 20 सालों में पानी के भंडारण का सबसे निचला स्तर दर्ज किया है।
जलवायु वैज्ञानिक डैनियल स्वेन के अनुसार, यह जलवायु परिवर्तन का एक "क्लासिक" उदाहरण है। इसे 'एलीवेशनली डिपेंडेंट डेफिसिट' कहा जा रहा है। इसका अर्थ है कि केवल बहुत ऊंची चोटियों (जैसे 9,000 फीट से ऊपर) पर ही बर्फ जमा हो पा रही है, जबकि मध्यम ऊंचाई वाली ढलानों पर, जहां से अधिकांश नदियां निकलती हैं, केवल बारिश हो रही है।
पहाड़ों पर जमा बर्फ एक 'प्राकृतिक जलाशय' का काम करती है, जो धीरे-धीरे पिघलकर गर्मियों में नदियों और बांधों को भरती है। इस साल बर्फ की कमी से लेक पावेल (Lake Powell) और लेक मीड (Lake Mead) जैसे विशाल जलाशयों के जलस्तर में भारी गिरावट की आशंका है। बर्फ के बिना वसंत ऋतु में खेतों की सिंचाई और शहरों के लिए पानी का संकट पैदा होना तय है।
बर्फ का सूखा सीधे तौर पर जंगलों की सेहत से जुड़ा है। सर्दियों में बर्फ न जमने के कारण मिट्टी की नमी खत्म हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि 'स्नो ड्रॉट' के कारण गर्मियों में जंगल की आग लगने की घटनाएं अधिक भीषण और अनियंत्रित हो सकती हैं, क्योंकि जंगल पहले से ही सूखे और संवेदनशील होंगे।
हालांकि सर्दियों के कुछ महीने अभी बाकी हैं और फरवरी-मार्च में भारी हिमपात की संभावना बनी रहती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर संशय में हैं। नासा के विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक का घाटा इतना बड़ा है कि आने वाले हफ्तों में होने वाली सामान्य बर्फबारी भी इसकी भरपाई नहीं कर पाएगी। यह स्थिति दर्शाती है कि ग्लोबल वार्मिंग किस तरह हमारी पृथ्वी के Water Cycle को स्थायी रूप से बदल रही है।