भारत के पास क्यों नहीं है एक भी अमेरिकी फाइटर जेट? रूस, फ्रांस और ब्रिटेन के ही लड़ाकू विमान को इस्तेमाल करती है IAF

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि भारत के पास अमेरिका का एक भी फाइटर जेट नहीं है। अमेरिका कई बार फाइटर जेट बेचने की कोशिश भारत को कर चुका है, हाल ही में ट्रंप ने एफ-35 भारत को बेचने की कोशिश की थी, फिर भी भारत, अमेरिकी फाइटर जेट के पीछे नहीं जाता है। दुनिया में अमेरिकी फाइटर जेट की चर्चा होती है, देश खरीदने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत, आज नहीं बल्कि अपनी आजादी के बाद से ही फाइटर जेट के लिए अमेरिका के पास कभी नहीं गया है।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Jul 1 2025, 12:20 IST
भारत के पास किस-किस देश के फाइटर जेटImage Credit : Indian govt/dassault aviation/wikimedia01 / 07

भारत के पास किस-किस देश के फाइटर जेट

भारत के पास कई देशों के फाइटर जेट हैं, जो उसकी वायु सेना की ताकत को बढ़ाते हैं। इन विमानों की विविधता भारत की रक्षा जरूरतों और रणनीतियों को पूरा करती है। रूस इस मामले में सबसे ऊपर है। रूसी फाइटर जेट भारत में काफी समय से सेवा में हैं और कई जंगों में भाग ले चुके हैं। रूस के अलावा भारत के पास फ्रांस और ब्रिटेन का फाइटर जेट है। इसके अलावा भारत का अपना स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान भी है।

अमेरिका से फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदता भारतImage Credit : Us navy02 / 07

अमेरिका से फाइटर जेट क्यों नहीं खरीदता भारत

भारत ने अमेरिका से फाइटर जेट खरीदे या नहीं, इसके पीछे कई वजहें और कारण हैं — कुछ रणनीतिक, कुछ तकनीकी, और कुछ राजनीतिक। अमेरिका, पाकिस्तान का काफी समय तक रक्षा सहयोगी रहा है। अमेरिका, पाकिस्तान को लड़ाकू विमान बेचते रहा है, जो भारत का मुख्य दुश्मन रहा है। ऐसे में भारत, अमेरिकी फाइटर जेट से दूरी बनाए रखता है, ताकि रणनीतिक तौर पर भारत मजबूत रहे।

रूस भी है एक फैक्टरImage Credit : Indian govt03 / 07

रूस भी है एक फैक्टर

भारत, आजादी के बाद से ही रूस के ज्यादा करीब रहा है। मुश्किल वक्त में जहां अमेरिका हमेशा से पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है, वहीं रूस भारत के साथ। भारत को रूस ने न केवल फाइटर जेट दिए हैं, बल्कि तकनीक भी दिया है। कुछ का तो उत्पादन भी यहां हो रहा है। भारत और रूस के बीच दशकों से बहुत गहरा रक्षा सहयोग रहा है। रूस ने भारत को भारी मात्रा में फाइटर जेट, टैंक्स, और मिसाइल सिस्टम्स सप्लाई किए हैं। रूस से खरीद भारत के लिए आसान और किफायती रहा है, साथ ही तकनीकी सपोर्ट भी अच्छा मिलता है।

यूरोपीय देशों से भी बना रखी थी दूरीImage Credit : Dassault aviation04 / 07

यूरोपीय देशों से भी बना रखी थी दूरी

भारत सिर्फ अमेरिका से ही नहीं बल्कि शुरुआती दौर के बाद यूरोपीय देशों से भी फाइटर जेट खरीदने में दूरी बना रखी थी। दरअसल यूरोपीय देश भी पाकिस्तान के ही ज्यादा करीब थे, फ्रांस ने पाकिस्तान को भी फाइटर जेट बेचे थे। जिससे भारत के सामने रणनीतिक मुश्किल थी, जिसके बाद भारत सिर्फ रूस ही डील करने लगा। अब हाल के सालों में भारत ने फ्रांस के लिए राफेल खरीदकर रास्ते खोले हैं।

अमेरिका से खरीदे हैं ट्रांसपोर्ट विमानImage Credit : Us air force05 / 07

अमेरिका से खरीदे हैं ट्रांसपोर्ट विमान

भारत ने अमेरिका से फाइटर जेट तो नहीं खरीदे हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट विमान जरूर खरीदे हैं, जिसका सेना इस्तेमाल करती है। जिसमें Boeing C-17 Globemaster III शामिल है। जिसे भारत ने 2010 में 10 विमान (लगभग $4.1 B) खरीदे, बाद में 2017 में एक अतिरिक्त विमान जोड़ा, जिससे कुल संख्‍या 11 हुई। ये विमान 2013–2014 में डिलीवर हुए। इसके अलावा Lockheed C-130J-30 Super Hercules भी खरीदे। 2008 में 6 (लगभग $1B), बाद में 2013 में 6 अतिरिक्त विमान खरीदे, जिसके बाद इसकी संख्या 12 हो घई। अंतिम विमान 2012 में डिलीवर हुआ।

अमेरिका से खरीदे लड़ाकू हेलीकॉप्टरImage Credit : Indian govt06 / 07

अमेरिका से खरीदे लड़ाकू हेलीकॉप्टर

भारत ने अमेरिका से लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी खरीदे हैं, जिसमें Boeing AH-64E Apache Guardian शामिल है। 2015 में IAF के लिए 22 AH‑64E हेलीकॉप्टर खरीदे गए। बाद में अतिरिक्त 6 सेना के लिए 2020 में खरीदे गए। इसके अलावा भारत ने Boeing CH-47F(I) Chinook भी खरीदा। IAF के लिए 15 CH-47F(I) हैवी‑लिफ्ट खरीदे गए।

 समुद्री विमान और ड्रोनImage Credit : Indian govt07 / 07

समुद्री विमान और ड्रोन

भारत ने अमेरिका से समुद्री विमान और ड्रोन भी खरीदे हैं। 2009 में नौसेना के लिए Boeing P-8I Poseidon खरीदा गया। MQ-9B SeaGuardian / Predator B ड्रोन भी अमेरिका से खरीदा गया। 31 बेड़े (15 नौसेना, 8 सेना, 8 वायुसेना) के लिए खरीदा गया। भारतीय सेना में अभी इनकी डिलीवरी हो रही है। इसके अलावा AGM-84L Harpoon Block II मिसाइलें भी खरीदी गई।

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