अमेरिका भी अपना 5वीं पीढ़ी का फाइटर प्लेन F-35 भारत को बेचना चाहता है लेकिन वह भी टेक्नॉलजी ट्रांसफर और 'सोर्स कोड' हस्तांतरित नहीं करना चाहता। वह 'मेक इन इंडिया' के तहत इसे भारत में भी बनाने के लिए तैयार नहीं है।
यह 'सोर्ड कोर' फाइटर प्लेन बनाने वाली कंपनी या देश के पास होता है। देश अपना फाइटर प्लेन तो बेचते हैं लेकिन इसका टेक्नॉलजी ट्रांसफर या 'सोर्स कोड' नहीं देते। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर प्लेन खरीदा है।
किसी फाइटर प्लेन में यदि मिसाइल या कोई हथियार लगाना है तो उसके 'सोर्स कोड' की जरूरत होती है। बिना 'सोर्स कोड' के उस फाइटर प्लेन में न तो कोई मिसाइल लग सकती है और न ही उसका अपग्रेडेशन हो सकता है।
भारत, फ्रांस से 'सोर्स कोड' मांगता आया है लेकिन फ्रांस की डसाल्ट एविएशन ने 'सोर्स कोड' देने से मना कर दिया है। ऐसे में भारत को अगर राफेल में अपनी मिसाइलें लगानी हैं तो उसे पहले फ्रांस से बात करनी होगी।
वहीं, रूस अपना 5वीं पीढ़ी का विमान SU-57E को भारत में बनाने और 100 प्रतिशत टेक्नॉलजी ट्रांसफर करने की पेशकश की है। वह 'सोर्स कोड' भी देने के लिए तैयार है। ऐसे में भारत आने वाले दिनों में रूस से SU-57E का सौदा कर सकता है। चर्चा यह भी है कि भारत फ्रांस के साथ 26 राफेल-एम का सौदा निरस्त कर सकता है।