क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी सादगी की मिसाल अच्छी पेंटर और लेखिका भी हैं, मुख्यमंत्री होकर भी खुद अपना खाना बनाती हैं? उनके जीवन के ये 7 पहलू आपको हैरान कर देंगे।
दीदी एक मंझी हुई पेंटर हैं। उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनियों से अब तक लाखों रुपये का फंड जुटाया जा चुका है, जिसे वे जनकल्याण और राहत कोष के लिए दान कर देती हैं।
राजनीति के व्यस्त सफर में भी उन्होंने कलम का साथ नहीं छोड़ा। ममता बनर्जी अब तक 100 से ज्यादा किताबें लिख चुकी हैं, जिनमें कविताएं और उनके वैचारिक लेख शामिल हैं।
मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी को रसोई में समय बिताना पसंद है। वे एक बेहतरीन कुक हैं और अक्सर अपने सहयोगियों के लिए खुद अपने हाथों से 'मोमोज' और 'चॉप' तैयार करती हैं।
सियासत के मैदान में विरोधियों को पछाड़ने वाली ममता बनर्जी असल जिंदगी में भी काफी मजबूत हैं। उन्होंने कॉलेज के दिनों में जूडो सीखा था।
1990 में एक जानलेवा हमले के दौरान उनके सिर पर गंभीर चोट आई थी। इस घटना में उन्हें कई टांके लगाने पड़े थे, जो उनके जुझारू व्यक्तित्व का आज भी बड़ा प्रतीक है।
किसानों के हक के लिए संघर्ष करते हुए उन्होंने सिंगूर आंदोलन के दौरान लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, जिसने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रचा था।
मुख्यमंत्री आज भी अपने पुराने पुश्तैनी घर के एक छोटे से कमरे में रहती हैं और केवल साधारण सूती साड़ी और हवाई चप्पल ही पहनती हैं।