लाइफलाइन एक्सप्रेस की शुरुआत 1991 में एक क्रांतिकारी विचार के साथ हुई थी, जिसका श्रेय 'इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन', भारतीय रेलवे और स्वास्थ्य मंत्रालय को जाता है। शुरुआत में इसे केवल तीन कोचों के साथ लॉन्च किया गया था, ताकि दूर-दराज के गांवों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सहायता दी जा सके। यह दुनिया की पहली 'हॉस्पिटल ऑन व्हील्स' (Hospital on Wheels) बनी, जिसने साबित किया कि अगर मरीज अस्पताल तक नहीं पहुँच सकता, तो अस्पताल को मरीज तक पहुंचाया जा सकता है।
यह ट्रेन उन जगहों तक जाती है जहां अस्पताल या डॉक्टर नहीं पहुंच पाते। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में कैंप लगाकर मरीजों का इलाज किया जाता है। स्थानीय प्रशासन के सहयोग से मरीजों को यहां लाया जाता है। इससे गांवों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलती है।
इस ट्रेन में ऑपरेशन थिएटर, लैब और मेडिकल उपकरण मौजूद होते हैं। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार सेवा देती है। आधुनिक तकनीक के जरिए गंभीर बीमारियों का इलाज संभव होता है। हर कोच को खास मेडिकल जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया गया है।
यहां मरीजों का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाता है। आंख, कान, हड्डी और कैंसर जैसी बीमारियों की सर्जरी होती है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलता है। यह ट्रेन कई लोगों को नई जिंदगी देने का काम कर रही है।
इस ट्रेन के डिब्बों के अंदर कदम रखते ही आपको किसी बड़े शहर के अस्पताल जैसा अहसास होगा। लाइफलाइन एक्सप्रेस के सात कोचों में दो अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, पाँच ऑपरेटिंग टेबल, एक पैथोलॉजी लैब और एक आधुनिक एक्स-रे यूनिट मौजूद है। यहाँ गंभीर से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सभी जरूरी मशीनें उपलब्ध हैं।
रेल हादसों के दौरान इलाज के लिए लाइफलाइन एक्सप्रेस (Lifeline Express) नहीं, बल्कि खास तौर पर तैयार की गई Accident Relief Medical Equipment Train को मौके पर भेजा जाता है।यह ट्रेन पूरी तरह आधुनिक मेडिकल सुविधाओं और जरूरी उपकरणों से लैस होती है, ताकि घायलों को तुरंत इलाज मिल सके। इसमें आपात स्थिति से निपटने के लिए डॉक्टरों की टीम और जरूरी संसाधन मौजूद रहते हैं।
ARME ट्रेन को भारतीय रेलवे में सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। हालात ऐसे होते हैं कि इसके लिए राजधानी एक्सप्रेस (Rajdhani Express) और शताब्दी (Shatabdi Express) जैसी तेज ट्रेनों को भी रोक दिया जाता है, ताकि यह बिना किसी देरी के दुर्घटनास्थल तक पहुंच सके।