Indian Ocean Tsunami: इंडोनेशिया में आए भूंकप की वजह से आई सुनामी मानव इतिहास में ज्ञात सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी। 14 देशों में अनुमानतः 2,27,898 लोगों की मौत हुई। आचे (इंडोनेशिया) में सबसे ज्यादा, श्रीलंका, तमिलनाडु (भारत) और खाओ लाक (थाईलैंड) में गंभीर रूप से तबाही मची। (फोटो साभार: एपी)
Indonesia Tsunami 2004: इसे 21वीं सदी की सबसे घातक प्राकृतिक आपदा और इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जाता है। इसी के साथ यह इतिहास की सबसे बड़ी सुनामी आपदा भी मानी जाती है। 9.2-9.3 मेगावॉट की तीव्रता वाला भूकंप, एशिया में अब तक का सबसे बड़ा और 21वीं सदी का सबसे शक्तिशाली भूकंप था। 1900 में आधुनिक भूकंप विज्ञान की शुरुआत के बाद से दुनिया में दर्ज किया गया यह कम से कम तीसरा सबसे शक्तिशाली भूकंप था। (फोटो साभार: एपी)
Indonesia Tsunami: भारत में इस प्राकृतिक आपदा की वजह से 12,205 लोगों की मौत हुई। हालांकि, अनुमानित आंकड़ा 16,269 का माना जाता है। सबसे ज्यादा नुकसान आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में हुआ। (फोटो साभार: एपी)
Tsunami in India: भूकंप के करीब दो घंटे बाद सुनामी भारतीय मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्वी तट पर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों तक पहुंच गई। उसी समय, इसने दक्षिण-पश्चिमी तट पर केरल राज्य को भी छू लिया। कुछ क्षेत्रों में स्थानीय उच्च ज्वार के साथ दो से पांच सुनामी आईं। (फोटो साभार: एपी)
Tamil Nadu Tsunami: तमिलनाडु के तट के साथ, चेन्नई में 13 किमी (8.1 मील) मरीना बीच पर सुनामी ने कहर बरपाया। एक रिसॉर्ट बीच पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में नजर आया कि सुनामी पानी की एक बड़ी दीवार के रूप में तट के पास पहुंची और जैसे-जैसे यह अंदर की ओर बढ़ी, बाढ़ आती गई। (फोटो साभार: एपी)
मीडिया रिपोट्स के मुताबिक हिंद महासागर आपदा के बाद के दो दशकों में सुनामी अनुसंधान, समुद्री सुरक्षा और पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास में काफी प्रगति हुई है। फिर भी विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि 2004 में हुए विनाश स्मृति धुंधली होने के कारण हमें आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए। 2004 की प्राकृतिक हादसे के ठीक सात वर्ष बाद 11 मार्च 2011 को जापान सुनामी आपादा इस बात का सबूत है सुनामी को लेकर लगातार रिसर्च, सतर्कता और तैयारी जरूरी है। (फोटो साभार: एपी)