आध्यात्मिक गुरु सदगुरु ने कई पेरेंटिंग टिप्स बताए हैं जिन्हें ईमानदारी से अपनाकर बच्चों की अच्छी परवरिश की जा सकती है। आइए डालते हैं सद्गुरु के पेरेंटिंग टिप्स पर एक नजर:
सद्गुरु कहते हैं कि बच्चे आपकी बातें नहीं सुनते, वे आपको देखते हैं। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि बच्चा अनुशासित, शांत और समझदार बने, तो पहले खुद उन गुणों को विकसित करें।
घर में डर, टोकना या चिंता का माहौल होने से बच्चा अपनी भावनाएं दबा सकता है। एक प्रेमपूर्ण, आनंदमय और सुरक्षित वातावरण में बच्चा खुलकर अपनी बात साझा करता है और सहज रूप से सीखता है।
सद्गुरु के अनुसार पेरेंट्स को खुद को सिर्फ शिक्षक न मानकर अपने बच्चे का साथी और दोस्त बनना चाहिए। जब आप उनके साथ छोटी-छोटी चीजों में बच्चों की तरह सीखने की कोशिश करते हैं, तो उनका विश्वास और समझ बड़ी आसानी से विकसित होती है।
कई बार माता-पिता वह चाहतें अपने बच्चों पर थोप देते हैं जो खुद के अधूरे ख्वाब होते हैं। सद्गुरु सलाह देते हैं कि बच्चों को उनकी पहचान और रुचि के अनुसार अपनी दुनिया बनाने की आजादी दें। इससे उनकी प्रतिभा स्वाभाविक रूप से विकसित होती है।
सफलता सिर्फ अच्छे नंबर या डिग्री पाने में नहीं है। बच्चों को यह सिखाएं कि समाज और परिवार के प्रति जिम्मेदारी समझना जरूरी है। यह भावना उन्हें आत्मनिर्भर और मेहनती बनाती है।
सिर्फ रट्टा लगाना या परीक्षा में अच्छे नंबर लाना बुद्धिमानी नहीं है। बच्चों को प्रश्न पूछने, सोचने, खोजने और समझने की आदत डालें। यह सीख उन्हें जीवन में कहीं भी असफलताओं से उबरने में मदद करती है।