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'सेना की गुंडागर्दी बंद करो!' PoK में भारी उपद्रव के बाद इस्लामाबाद की सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

PoK Unrest: रावलकोट में हुई हिंसा और सैन्य कार्रवाई की आग पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंच गई है। नेशनल प्रेस क्लब के बाहर छात्रों, वकीलों और नागरिक समाज ने जोरदार प्रदर्शन कर पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।

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PoK में गोलीबारी और दमन को लेकर लोगों में रोष

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट और मीरपुर इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई और दमनकारी नीतियों की आग अब राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंच चुकी है। रावलकोट में हाल ही में हुए खून-खराबे और मौतों के विरोध में छात्रों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस्लामाबाद की सड़कों पर उतरकर बड़ा मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तान की राजधानी में हाल के महीनों में देखा गया यह सबसे बड़ा और सबसे मुखर प्रदर्शन माना जा रहा है।

नेशनल प्रेस क्लब के बाहर भारी जुटान

इस्लामाबाद स्थित नेशनल प्रेस क्लब के बाहर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर रावलकोट और PoK के अन्य हिस्सों में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए अत्याचारों और कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की गई थी। प्रदर्शन में शामिल छात्रों और वकीलों के समूहों ने पाकिस्तानी सरकार और सैना के खिलाफ उग्र नारेबाजी की तथा रावलकोट हिंसा के शिकार हुए निर्दोष पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की।

रावलकोट में दमनकारी कार्रवाई के बाद भड़का आक्रोश

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से PoK के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मिरपुर क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों, महंगाई, आटे की किल्लत और बिजली दरों को लेकर व्यापक जनांदोलन चल रहा है। इस आंदोलन को दबाने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से बल प्रयोग, आंसू गैस और गोलीबारी की खबरें आई हैं, जिसमें कई लोगों की जान जाने और दर्जनों लोगों के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। इलाके में इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद किए जाने के बाद यह गुस्सा पाकिस्तान की मुख्य भूमि तक फैल गया है।

नागरिक संगठनों और वकीलों ने दी चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक PoK में गिरफ्तार किए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया जाता, हिंसा के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और दमनकारी नीतियां बंद नहीं की जातीं, तब तक यह विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं। वकीलों के संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जनता की जायज मांगों को नजरअंदाज करना जारी रखा, तो आंदोलन पूरे देश में और भी बड़ा होगा।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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