बारिश का मौसम आते ही आसमान पर बादलों की चादर छा जाती है। कई बार लगातार कई दिनों तक सूरज दिखाई नहीं देता। ऐसे में मौसम भले सुहाना लगे, लेकिन शरीर के लिए प्राकृतिक रोशनी की कमी कुछ परेशानियां बढ़ा सकती है। इसलिए जब भी बादलों के बीच धूप की छोटी-सी खिड़की खुले, उसका फायदा उठाना समझदारी है।
सुबह या दिन के समय मिलने वाली प्राकृतिक रोशनी शरीर की सर्केडियन रिदम यानी सोने-जागने की प्राकृतिक घड़ी को व्यवस्थित रखने में मदद करती है। बारिश में धूप कम मिलने पर कुछ समय बाहर प्राकृतिक रोशनी में बिताना दिनचर्या को संतुलित रखने में उपयोगी हो सकता है।
सूरज की UVB किरणें त्वचा में विटामिन D बनने की प्रक्रिया में भूमिका निभाती हैं। लगातार बादल, घर के अंदर रहना और धूप से लगभग पूरी तरह दूरी बनाने पर शरीर को मिलने वाला UVB एक्सपोजर कम हो सकता है। हालांकि केवल धूप को विटामिन D का एकमात्र स्रोत नहीं माना जाना चाहिए।
कई दिनों तक कमरे में बंद रहना और प्राकृतिक रोशनी कम मिलना कुछ लोगों में सुस्ती, चिड़चिड़ापन या लो-मूड जैसी भावनाओं से जुड़ सकता है। बारिश के बीच थोड़ी देर खुले वातावरण में रहना मन को तरोताजा करने में मदद कर सकता है।
सुबह की प्राकृतिक रोशनी शरीर की जैविक घड़ी को दिन और रात का संकेत देने में मदद करती है। इसलिए लगातार अंधेरा या कम रोशनी वाला वातावरण सोने-जागने के समय को प्रभावित कर सकता है। सुबह पर्दे खोलना और प्राकृतिक रोशनी लेना एक आसान आदत है।
बारिश के बीच अगर सुरक्षित तरीके से धूप निकल आए, तो कुछ मिनट बालकनी, छत या खुले स्थान पर प्राकृतिक रोशनी में बिताया जा सकता है। तेज धूप में लंबे समय तक रहने की जरूरत नहीं है और बारिश के दौरान बिजली चमकने या तेज हवा होने पर बाहर नहीं जाना चाहिए।
अगर लगातार कई दिनों तक धूप नहीं निकल रही है, तो दिन में घर की खिड़कियां खोलकर प्राकृतिक रोशनी अंदर आने दें। साथ ही पौष्टिक भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त नींद पर ध्यान दें। विटामिन D की कमी का संदेह हो तो डॉक्टर की सलाह से जांच और सप्लीमेंट पर विचार करें।