World IVF Day: आज के समय में आईवीएफ (IVF) उन दंपतियों के लिए बड़ी उम्मीद बन चुका है, जो लंबे समय से बच्चा चाहते हैं लेकिन प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण नहीं हो पा रहा है। हालांकि, हर महिला के लिए आईवीएफ तुरंत कराना सही नहीं होता। डॉ. कृति तिवारी, चीफ आईवीएफ स्पेशलिस्ट, शी देल्ही हॉस्पिटल के मुताबिक, कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में पहले शरीर को इलाज के जरिए तैयार करना जरूरी होता है। अगर जल्दबाजी में आईवीएफ कराया जाए, तो इसकी सफलता पर असर पड़ सकता है और मां की सेहत के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।
डॉ. कृति तिवारी बताती हैं कि अगर किसी महिला को दिल या फेफड़ों की गंभीर बीमारी है, तो पहले उसकी पूरी जांच की जाती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में बिना डॉक्टर की सलाह के आईवीएफ कराना सुरक्षित नहीं माना जाता।
अगर किडनी या लिवर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो पहले उनका इलाज जरूरी होता है। वहीं, अगर बच्चेदानी में ऐसी समस्या है, जिससे गर्भ ठहरना मुश्किल हो, तो डॉक्टर पहले उसकी जांच करते हैं। हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए इलाज भी उसी हिसाब से तय किया जाता है।
अगर किसी महिला की शुगर, ब्लड प्रेशर या थायरॉयड की समस्या नियंत्रण में नहीं है, तो पहले उसे ठीक करने की सलाह दी जाती है। डॉ. तिवारी कहती हैं कि जब ये बीमारियां संतुलित रहती हैं, तब आईवीएफ की सफलता की संभावना भी बेहतर हो सकती है।
अगर किसी महिला का कैंसर का इलाज शुरू होने वाला है, तो पहले डॉक्टर से भविष्य में मां बनने की योजना पर बात करनी चाहिए। कई बार इलाज शुरू होने से पहले अंडों को सुरक्षित रखने की सलाह दी जाती है, ताकि आगे चलकर मां बनने का मौका बना रहे। जरूरत पड़ने पर दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
डॉ. कृति तिवारी का कहना है कि आईवीएफ कराने से पहले अपनी हर पुरानी बीमारी और दवा की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। सही समय पर जांच, बीमारी का सही इलाज और विशेषज्ञ की सलाह मानने से आईवीएफ की सफलता की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए बिना पूरी जांच के कोई भी फैसला लेने से बचें।
प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।