1900 के दशक में महिलाओं को शिक्षा पर ध्यान देना तो दूर इसे गलत माना जाता था। लेकिन उस दौरान समाज सुधारक डॉ धोंडो केशव कर्वे ने महिलाओं की शिक्षा का मुद्दा उठाया।
शुरुआत में उन्होंने विधवा महिलाओं को पढ़ने से शुरुआत की और उसके साथ ही उन्होंने एक ऐसे विश्वविद्यालय के बारे में सोचा, जो केवल महिलाओं के लिए होगा।
महिलाओं की शिक्षा के लिए लड़ने वाले डॉ धोंडो केशव कर्वे ने लंबे समय बाद लोगों के सहयोग से 1916 में भारत के पहले महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की। हालांकि इसे मान्यता 1951 में मिली थी।
भारत के पहले महिला विश्वविद्यालय का नाम श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरे महिला विश्वविद्यालय (SNDT Women's University) है। बता दें कि यूनिवर्सिटी का नाम एक व्यापारी सर विठ्ठलदास ठाकरे की मां के नाम पर रखा गया, क्योंकि उनके द्वारा विश्वविद्यालय बनवाने में आर्थिक रूप से सहायता की गई थी।
बता दें कि इस विश्वविद्यालय की शुरुआत सैंकड़ों नहीं, बल्कि केवल 5 छात्राओं के साथ हुई थी। लेकिन आज इस कैंपस में हजारों छात्राएं अपना सपनों को पंख देने के लिए आती हैं।
SNTD वुमन यूनिवर्सिटी में आर्ट्स, साइंस, एजुकेशन, कॉमर्स, ह्यूमैनिटीज, लॉ, बिजनेस, फैशन आदि जैसे विभिन्न प्रकार के विषयों की शिक्षा दी जाती है।