भारत में इंजीनियरिंग के कई ब्रांच हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैकेनिकल इंजीनियर और इलेकेट्रिकल इंजीनियर में क्या अंतर होता है। अक्सर लोग गलती कर देते हैं।
बता दें मैकेनिकल इंजीनियरिंग मशीनों से जुड़ी ब्रांच है। इसमें मशीनों की डिजाइन, निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के बारे में पढ़ाया जाता है। इस ब्रांच में छात्रों को थर्मोडायनेमिक्स, मशीन डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, फ्लूइड मैकेनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसी विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग बिजली और उससे जुड़े सिस्टम पर आधारित होती है। यहां छात्रों को पावर सिस्टम, इलेक्ट्रिकल मशीन, कंट्रोल सिस्टम, हाई वोल्टेज, सर्किट और ऊर्जा प्रबंधन जैसे सब्जेक्ट्स के बारे में पढ़ाया जाता है।
एक मैकेनिकल इंजीनियर मशीनों और उनके पार्ट्स पर काम करते हैं। वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिजली और विद्युत उपकरणों पर काम करते हैं।
मैकेनिकल में मशीन डिजाइन, इंजन और मैन्युफैक्चरिंग पर अधिक ध्यान दिया जाता है। जबकि इलेक्ट्रिकल में बिजली, मोटर, जनरेटर और पावर सिस्टम पर ज्यादा फोकस होता है।
एक मैकेनिकल इंजीनियर ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन कंपनियों में काम करते हैं। मैकेनिकल से जुड़ा काम में इनकी डिमांग काफी ज्यादा होती है।
इसके अलावा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बिजली से जुड़े सिस्टम की योजना पर काम करते हैं। अक्सर किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी कंपनियों में इनकी डिमांड सबसे ज्यादा होती है।