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'वर्दी उतारो और चुनाव लड़ो...': पाकिस्तानी नेता ने सेना प्रमुख असीम मुनीर को दी खुली चुनौती; बोले- 'बलूचिस्तान हाथ से निकल चुका है'

General Asim Munir Pakistan Army: पाकिस्तान में बड़ा सियासी भूचाल! कद्दावर नेता मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे सेना प्रमुख असीम मुनीर को ललकारा। कहा- 'वर्दी उतारो और चुनाव लड़ो, बलूचिस्तान हमारे हाथ से निकल चुका है।'

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'वर्दी उतारो और चुनाव लड़ो...': पाकिस्तानी नेता ने सेना प्रमुख असीम मुनीर को दी खुली चुनौती; बोले- 'बलूचिस्तान हाथ से निकल चुका है'

Maulana Fazlur Rehman Speech Qasur: पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेताओं में से एक, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने देश की शक्तिशाली सैन्य स्थापना और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। पंजाब के कसूर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मौलाना ने सेना को उसकी संवैधानिक सीमाओं में रहने की चेतावनी दी और कहा कि अगर उसे राजनीति करने का इतना ही शौक है, तो वह खुलकर मैदान में आए।

मौलाना फजलुर रहमान ने गरजते हुए कहा, 'अगर राजनीति ही करनी है, तो वर्दी उतारकर सामने आओ; चुनावों में हिस्सा लो, फिर साफ हो जाएगा कि जनता वर्दीवालों को कितने वोट देती है।'

'बलूचिस्तान पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो चुका है'

जनसभा में मौलाना ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की बेहद डरावनी और गंभीर तस्वीर पेश की। उन्होंने दावा किया कि देश धीरे-धीरे बिखर रहा है और सरकार का अपने ही सूबों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है।

बलूचिस्तान की स्थिति पर मौलाना ने कहा, 'बलूच इलाकों में बगावत थमी नहीं है। पूरा बलूचिस्तान क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर निकल चुका है। आज भी वहां पाकिस्तान सरकार की कोई रिट (कानून का शासन) काम नहीं कर रही है।'

खैबर पख्तूनख्वा में खूनखराबा हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि बलूचिस्तान की यह आग अब पश्तून बहुल इलाकों (खैबर पख्तूनख्वा) में भी फैल चुकी है। उन्होंने दावा किया, 'हम बलूच क्षेत्र को किसी तरह संभाल रहे थे; अब पश्तून क्षेत्र भी खून में डूब रहा है। हमें सिर्फ दो-तीन दिनों के भीतर ही पचास से अधिक शव मिले हैं। देश टूट रहा है, हमारे हुक्मरान कहां हैं?'

सेना प्रमुख असीम मुनीर की 'अपील' को किया खारिज

मौलाना का यह गुस्सा हाल ही में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल मुनीर के उस बयान के बाद फूटा है, जिसमें उन्होंने देश के आम नागरिकों से आतंकवाद और उग्रवादी गुटों के खिलाफ लड़ाई में सेना के साथ खड़े होने की अपील की थी। मुनीर ने कहा था कि जनता के समर्थन के बिना सेना अकेले उग्रवाद को खत्म नहीं कर सकती।

मौलाना फजलुर रहमान ने इस अपील को सिरे से खारिज करते हुए सेना के 'एहसानों' पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने टैक्स के पैसे और फौज की ड्यूटी पर उठाए सवाल और कहा, 'वे (सेना) कहते हैं कि हमारे युवा शहीद हो रहे हैं। आपके युवा वर्दी पहनते ही इसी मकसद के लिए हैं! उन्हें देश की सुरक्षा की रक्षा करने के लिए मोटी तनख्वाह दी जाती है। आप अपने खून का एहसान मुझ पर (जनता पर) क्यों थोप रहे हैं? आप हमारे खून-पसीने की कमाई से आने वाले टैक्स से अपनी सैलरी ले रहे हैं, और फिर हमसे कहते हैं कि हम अपनी मिलिशिया (निजी सेना) बनाएं और हथियारों से लैस उग्रवादी गुटों से खुद लड़ें? मैंने कोई सैलरी नहीं ली है, मैं अपनी कोई फौज नहीं बनाऊंगा। देश की रक्षा करना आपका संवैधानिक काम है, इसे नागरिकों पर मत डालिए।'

'अपनी सीमा में रहें, सरकारें बनाना और गिराना बंद करें'

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुभवी राजनीतिज्ञ ने पाकिस्तानी सेना पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद के अधिकारों को लगातार कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सेना ने देश की राजनीति को अपने इशारों पर नचाने का जरिया बना लिया है।

सीमा तय करने की चेतावनी देते हुए फजलुर रहमान ने कहा, 'संसद की अपनी एक सीमा है, देश के हर विभाग का अपना एक अधिकार क्षेत्र है, और इसी तरह सेना का भी अपना एक दायरा है। सेना की अपनी जिम्मेदारियां हैं। अपनी जिम्मेदारियों पर नजर रखिए, राजनीति पर नहीं।'

पीछे से सरकार चलाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने सीधे तौर पर सेना की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप जिसे चाहते हैं उसे सत्ता सौंप देते हैं और जिससे चाहते हैं उससे सत्ता छीन लेते हैं। उन्होंने तंज कसा, 'यह पर्दे के पीछे की राजनीति किसी और को समझाइये, हमें समझाने की कोशिश मत कीजिए। बिना वोटर्स का सामना किए आप हुकूमत नहीं चला सकते।'

'पीढ़ियों की दुश्मनी पैदा कर रही है सेना'

रणनीतिक मामलों पर सेना की नीतियों की आलोचना करते हुए जेयूआई-एफ प्रमुख ने चेतावनी दी कि सुरक्षा बल तो ऑपरेशन करके चले जाएंगे, लेकिन वे स्थानीय आबादी को एक ऐसे गृहयुद्ध में झोंक रहे हैं जो कभी खत्म नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को सशस्त्र समूहों के सामने ढाल की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति से समाज में गहरे मतभेद पैदा होंगे और आने वाली पीढ़ियां हमेशा के लिए हत्या, लूटपाट और आपसी पारिवारिक दुश्मनों के अंतहीन चक्र में फंस जाएंगी। मुख्यधारा के किसी बड़े नेता द्वारा पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की यह सार्वजनिक आलोचना बताती है कि पाकिस्तान के भीतर सेना के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर असंतोष किस कदर चरम पर पहुंच चुका है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ा author

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदे... और देखें

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