13 जून को देहरादून स्थित प्रतिष्ठित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) में आयोजित हुई पासिंग आउट परेड में शनान ढाका को भारतीय सेना में एक कमीशंड ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया गया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने परिवार के सेना में लंबे और गौरवशाली सर्विस रिकॉर्ड में अपना नाम भी दर्ज कर लिया है। परिवार के लिए इसे बड़ा दिन क्या होगा, जब तीसरी पीढ़ी भी सेना में शामिल हुई है।
शनान ढाका के रगों में देश सेवा का जज्बा बचपन से ही दौड़ रहा था। देश भर के अलग-अलग सैनिक कैंटोनमेंट में पली-बढ़ीं शनान के लिए सेना में जाना केवल एक नौकरी या करियर का विकल्प नहीं था। यह एक ऐसा लाइफस्टाइल और माहौल था, जिसे उन्होंने बचपन से बेहद करीब से देखा और जिया। पहले दादा फिर पिता को सेना की वर्दी में देखते हुए उनमें भी देश की सेवा करने की इच्छा ने घर किया और वह अपने परिवार से भारतीय सेना में शामिल होने वाली तीसरी पीढ़ी बनी। बता दें कि उनके परिवार में देश की रक्षा का यह सिलसिला उनके दादाजी से शुरू हुआ था, जो सेना में 'सूबेदार' के पद से रिटायर हुए थे। दादा के बाद पिता ने नायब सूबेदार के पद पर रिटायर होकर इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया और बस परिवार के उसी नक्शेकदम पर शनान भी सेना में शामिल हुई।
शनान ही नहीं, उनकी बहन भी सेना से दूर नहीं हैं। वह भी देश की सेवा में अपना योगदान दे रही है। वर्तमान में 'आर्मी मेडिकल कॉर्प्स' में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में सेवा कर रही हैं।
साल 2021 में Supreme Court का एक ऐतिहासिक फैसला आया था, जिसने भारतीय सैन्य इतिहास की दिशा बदल दी थी। इस फैसले ने महिलाओं के लिए नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के दरवाजे खोल दिए थे। इस फैसले के दौरान शनान यूपीएससी में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने इस फैसले के बारे में सुना, तो उनके सामने देश की सेवा और सेना की वर्दी आ गई और उन्होंने यूपीएससी छोड़ देश की सेवा के राह चुनी और अपने इस सपने को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत की।
बता दें कि 13 जून की यह तारीख न केवल शनान के लिए, बल्कि भारतीय सेना और IMA के लिए भी एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। साल 1932 में अपनी स्थापना के बाद से IMA ने कई पीढ़ियों के 'जेंटलमैन कैडेट्स' को ट्रेनिंग देकर ऑफिसर बनाया, लेकिन इतिहास में यह पहली बार हुआ जब NDA की परीक्षा पास कर आई महिला कैडेट्स को कमीशंड ऑफिसर के रूप में यहां से मार्च पास्ट करते हुए गुजरते देखा गया।
IMA देहरादून के 94 साल के लंबे इतिहास में यह पहली बार था, जब महिला ऑफिस कैडेट्स का पूरा का पूरा एक बैच यहां से पास आउट हुआ था। बता दें कि इस पासिंग आउट परेड के बीच में शनान ढाका समेत 9 महिला कैडेट्स को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में तैनाती मिली।
कमीशन होने के बाद अपनी खुशी और गर्व को साझा करते हुए लेफ्टिनेंट शनान ढाका ने कहा, "यह पल एक ही समय में बेहद गर्व और एक बड़ी जिम्मेदारी का गहरा एहसास कराता है।" उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान मुकाबला कड़ा था। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए यह भी साफ कर दिया कि सेना में कोई महिला-पुरुष नहीं होता है। जेंडर के आधार पर यहां को रियायत नहीं मिलती है। यहां पुरुष कैडेट्स की तरह ही मेहनत करनी पड़ती है और खुद को हर पड़ाव पर साबित करना पड़ता है।