कितना पढ़े लिखे हैं राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO Jeetendra Mishra, यहां देखें उनका पूरा करियर

Ram Mandir Trust First CEO Jitendra Mishra Education: बुधवार, 2 सितंबर को राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO का ऐलान कर दिया गया है। इस पद का जिम्मा भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्श जितेंद्र मिश्रा संभालने वाले हैं। ऑपरेशन सिंदूर और कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ कितना पढ़े-लिखे हैं आइए जानते हैं।

Authored by: Varsha KushwahaUpdated Sep 2 2026, 17:59 IST
सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल और अन्य सैन्य सम्मान01 / 07

सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल और अन्य सैन्य सम्मान

​सैन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए जितेंद्र मिश्रा को कई प्रतिष्ठित नागरिक व सैन्य सम्मानों से नवाजा गया है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा और कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर 'सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल' (SYSM) से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व, राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2024 में 'अति विशिष्ट सेवा मेडल' (AVSM) और वर्ष 2013 में 'विशिष्ट सेवा मेडल' (VSM) प्रदान किया जा चुका है।​

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा एक अत्यंत उच्च शिक्षित, सैन्य रणनीति एक्सपर्ट और सम्मानित पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। भारतीय वायु सेना में कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए 38 साल का बेमिसाल करियर बिताने के बाद, अब वे अपनी प्रशासनिक क्षमताओं से राम मंदिर प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे। आइए राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के बारे में विस्तार से जानते हैं। Image Credit : AI02 / 07

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा एक अत्यंत उच्च शिक्षित, सैन्य रणनीति एक्सपर्ट और सम्मानित पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। भारतीय वायु सेना में कारगिल युद्ध से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए 38 साल का बेमिसाल करियर बिताने के बाद, अब वे अपनी प्रशासनिक क्षमताओं से राम मंदिर प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे। आइए राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के बारे में विस्तार से जानते हैं।

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव और परिवार​Image Credit : AI03 / 07

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव और परिवार​

​जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र स्थित भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनका यह गांव अयोध्या के सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर स्थित है। वे एक साधारण मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता पेशे से एक लेक्चरर थे। भारतीय वायु सेना में अपने शानदार करियर के बाद रिटायर होने के बाद, अब जब उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के पहले CEO के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तो इसके साथ उत्तर प्रदेश से उनका नाता और भी मजबूत हो गया। क्योंकि अब उनका जुड़ाव केवल पारिवारिक नहीं रहा है।​

देश-विदेश के टॉप संस्थानों से हासिल की शिक्षाImage Credit : AI04 / 07

देश-विदेश के टॉप संस्थानों से हासिल की शिक्षा

​जी हां, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा एक हायली एजुकेटेड और सैन्य रणनीति में बेहद ट्रेंड अधिकारी हैं। उन्होंने भारत के साथ-साथ दुनिया के कुछ सबसे प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों से अपनी शिक्षा पूरी की है। वे पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और डुंडीगुल स्थित वायु सेना अकादमी (AFA) के पूर्व छात्र रहे हैं। विमान परीक्षण में महारत के लिए उन्होंने 'एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल' से प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा, उन्होंने अमेरिका के मोंटगोमरी स्थित 'एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज' और यूनाइटेड किंगडम (UK) के शीर्ष संस्थान 'रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज' से उच्च-स्तरीय रणनीतिक एवं सुरक्षा अध्ययन की शिक्षा प्राप्त की है।​

38 साल से अधिक का बेमिसाल IAF करियरImage Credit : AI05 / 07

38 साल से अधिक का बेमिसाल IAF करियर

​बता दें कि जितेंद्र मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को वायु सेना अकादमी से भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में बतौर फाइटर पायलट कमीशन किया गया था। उनका सैन्य करियर 38 वर्षों से अधिक लंबा रहा है, जिसके दौरान उन्होंने 3,000 घंटे से भी ज्यादा की उड़ान का समृद्ध अनुभव हासिल है। अपने करियर में उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए।​

कारगिल युद्ध और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में योगदान​Image Credit : AI06 / 07

कारगिल युद्ध और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में योगदान​

​अपने सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल जिम्मेदारियां भी निभाईं। स्क्वाड्रन लीडर के रूप में वह उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया, जिसका प्रयोग ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल पर हमलों में किया गया था। उन्होंने विंग कमांडर के पद पर एचएएल (HAL) नासिक डिवीजन में चीफ टेस्ट पायलट के रूप में भूमिका निभाई है। ग्रुप कैप्टन रहते हुए जून 2010 में उन्होंने फ्रांस में आयोजित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास 'गरुड़ IV' में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व किया था।​

सीनियर कमान और वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारीImage Credit : AI07 / 07

सीनियर कमान और वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी

​एयर कमोडोर के पद पर रहते हुए मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली और पठानकोट की कमान संभाली। इसके बाद एयर वाइस मार्शल के रूप में उन्होंने एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ और एएसटीई (ASTE) के कमांडेंट के रूप में कार्य किया। एयर मार्शल बनने के बाद वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ और बाद में डिप्टी चीफ (ऑपरेशन्स) रहे। 1 जनवरी 2025 को उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का सर्वोच्च पद संभाला और अप्रैल 2026 में रिटायरमेंट हासिल की।​

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