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Bokaro News : बारिश आई और बह गई मजबूती, निर्माणाधीन पुल का गार्डवाल ध्वस्त; 1.22 करोड़ का ब्रिज पहली परीक्षा में फेल

Bokaro Chandankiyari Bridge News : झारखंड के बोकारो के चंदनकियारी में 1.22 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे खलिसा नदी पुल का एप्रोच रोड गार्डवाल भारी बारिश में धंसकर टूट गया। ग्रामीणों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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बोकारो के चंदनकियारी में खलिसा नदी पुल गार्डवाल धंसा

बोकारो : चंदनकियारी में करीब 1.22 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा खलिसा नदी पुल निर्माणाधीन अवस्था में ही सवालों के घेरे में आ गया है। पुल अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुआ था कि भारी बारिश के दौरान एप्रोच रोड का गार्डवाल धंसकर टूट गया। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

निर्माण में गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप

घाघरी और कालियादाग गांव के पास बन रहे इस पुल को ग्रामीणों के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। लेकिन गार्डवाल के क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण में गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत वाली परियोजना का गार्डवाल निर्माण के दौरान ही कैसे धंस गया, इसकी तकनीकी जांच होनी चाहिए।

इंजीनियर पर एक्शन का प्लान ?

ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ ही दोषी संवेदक और संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की भी मांग उठाई गई है।

भारी बारिश है या निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कोई कमी

हालांकि, गार्डवाल के टूटने की वास्तविक वजह लगातार हुई भारी बारिश है या निर्माण कार्य की गुणवत्ता में कोई कमी, इसका स्पष्ट पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल निर्माणाधीन पुल के एप्रोच रोड का गार्डवाल धंसने से परियोजना की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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