दुनिया की वह जमीन, जिसे कोई देश नहीं चाहता! क्यों आज तक 'लावारिस' है यह इलाका

जमीन के एक छोटे से भूखंड के लिए संघर्षों का इतिहास काफी पुराना रहा है। अक्सर देखा जाता है कि परिवारों, रिश्तेदारों और ग्रामीण समुदायों के बीच भूमि को लेकर गहरा विवाद होता है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के मध्य यही जमीन के युद्धों का कारण बनती है। इससे स्पष्ट होता है कि विश्व में भूमि का आर्थिक और सामरिक मूल्य कितना अधिक है। लेकिन इस आपाधापी के बीच दुनिया में एक ऐसा क्षेत्र भी मौजूद है, जो आज भी 'लावारिस' की स्थिति में है। यह जानकर आश्चर्य होता है कि पृथ्वी के उस हिस्से पर अधिकार जताना तो दूर, कोई भी देश उसे अपनी सीमाओं में शामिल करने को तैयार नहीं है। जहां एक ओर इतिहास से लेकर वर्तमान तक जमीन के हर टुकड़े पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की होड़ लगी है, वहीं यह विशेष स्थान आज भी इस प्रतीक्षा में है कि कोई राष्ट्र इसे अपना घोषित करे। आइए, विस्तार से जानते हैं उस अनोखे और लावारिस स्थान के बारे में जिसे कोई भी देश अपनाना नहीं चाहता।

Authored by: वर्षा कुशवाहाUpdated May 5 2026, 11:57 IST
कहां है यह अनोखी जगह?Image Credit : Canva01 / 07

कहां है यह अनोखी जगह?

​अफ्रीका में मिस्र और सूडान के बीच स्थित जिस लावारिस स्थान की बात हम कर रहे हैं उसका नाम है 'बीर ताविल'। यह एक रेगिस्तानी इलाका है, जहां दूर-दूर तक रेत और पत्थर देखने को मिलते हैं। यहां इंसानों की बसावट न के बराबर है।​

कितनी बड़ी है यह जमीन​Image Credit : Canva02 / 07

कितनी बड़ी है यह जमीन​

​लोग आज के समय में 5 गज जमीन तक नहीं छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में 2060 वर्ग किलोमीटर का जमीन का यह विशाल टुकड़ा आज भी लावारिस है, जिस पर कोई देश और संगठन अपना हक नहीं जमाना चहता।​

बिन मालिक कैसे रह गई यह जमीन​Image Credit : Canva03 / 07

बिन मालिक कैसे रह गई यह जमीन​

​शुरू से बिन मालिक नहीं थी यह जमीन। जी हां, अंग्रेजों के शासनकाल में जब सीमाएं तय करने के लिए नक्शे बनाए जा रहे थे, उस दौरान 1899 में एक सीमा तय की गई थी, जिसके अनुसार, बीर ताविल एक देश के हिस्से में थी। फिर 1902 में एक अन्य सीमा बनी, तब जमीन की स्थिति बदली और यह जमीन दूसरे देश के हिस्से में आ गई। जिनके हिस्से में यह जमीन आई थी, वह सूडान और मिस्र।​

न सुडान ने, न मिस्र ने जमीन पर अधिकार माना Image Credit : Canva04 / 07

न सुडान ने, न मिस्र ने जमीन पर अधिकार माना

​दो अलग नक्शे में दो अलग देशों में इस जमीन के आने से ही असली खेल की शुरुआत हुई, क्योंकि दोनों ही देश अलग-अलग नक्शे को मानते हैं और इस जमीन पर अपना अधिकार नहीं समझते। दोनों देशों द्वारा छोड़े जाने पर और इस जमीन पर अधिकार न मानने से इस इलाका को 'नो मैन्स लैंड' कहा गया।​

क्या है इस स्थान के लावारिस होने की वजह​Image Credit : Canva05 / 07

क्या है इस स्थान के लावारिस होने की वजह​

​2060 वर्ग किलोमीटर में फैला यह स्थान रेड सी के पास स्थित है और पूरा इलाका रेगिस्तान है, यहां न पानी है और न ही कोई पेड़-पौधे और जानवर है। बेहद गर्म हवाएं चलती हैं और सूखा होने के कारण खेती नहीं हो सकती है। साथ ही इस स्थान का तापमान साल के अधिकांश समय में 40 डिग्री से अधिक रहता है। यही कारण है कि यहां रहना किसी के लिए बहुत मुश्किल है।​

लावारिस फिर भी दुनिया के लिए खासImage Credit : Canva06 / 07

लावारिस फिर भी दुनिया के लिए खास

​भले ही बिर ताविल इलाका लावारिस की तरह है, क्योंकि इस पर कोई देश अपना हक नहीं जमाना चाहता, लेकिन फिर भी यह दुनिया के लिए खास है, क्योंकि यह इलाका बताता है कि जमीन की कीमत केवल उसके आकार पर नहीं बल्कि उसके संसाधनों और महत्व को तय होती है।​

जमीन की लड़ाई के बीच अपवाद जगह​Image Credit : Canva07 / 07

जमीन की लड़ाई के बीच अपवाद जगह​

​जहां दुनिया में जमीन के एक इंच के लिए लड़ाई होती हैं, वहां बीर ताविल एक ऐसा अपवाद है, जिस पर कोई हक नहीं जताना चाहता। नाम होते हुए भी यह इलाका एक बेनाम इलाका बना हुआ है। ​

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