अफ्रीका में मिस्र और सूडान के बीच स्थित जिस लावारिस स्थान की बात हम कर रहे हैं उसका नाम है 'बीर ताविल'। यह एक रेगिस्तानी इलाका है, जहां दूर-दूर तक रेत और पत्थर देखने को मिलते हैं। यहां इंसानों की बसावट न के बराबर है।
लोग आज के समय में 5 गज जमीन तक नहीं छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में 2060 वर्ग किलोमीटर का जमीन का यह विशाल टुकड़ा आज भी लावारिस है, जिस पर कोई देश और संगठन अपना हक नहीं जमाना चहता।
शुरू से बिन मालिक नहीं थी यह जमीन। जी हां, अंग्रेजों के शासनकाल में जब सीमाएं तय करने के लिए नक्शे बनाए जा रहे थे, उस दौरान 1899 में एक सीमा तय की गई थी, जिसके अनुसार, बीर ताविल एक देश के हिस्से में थी। फिर 1902 में एक अन्य सीमा बनी, तब जमीन की स्थिति बदली और यह जमीन दूसरे देश के हिस्से में आ गई। जिनके हिस्से में यह जमीन आई थी, वह सूडान और मिस्र।
दो अलग नक्शे में दो अलग देशों में इस जमीन के आने से ही असली खेल की शुरुआत हुई, क्योंकि दोनों ही देश अलग-अलग नक्शे को मानते हैं और इस जमीन पर अपना अधिकार नहीं समझते। दोनों देशों द्वारा छोड़े जाने पर और इस जमीन पर अधिकार न मानने से इस इलाका को 'नो मैन्स लैंड' कहा गया।
2060 वर्ग किलोमीटर में फैला यह स्थान रेड सी के पास स्थित है और पूरा इलाका रेगिस्तान है, यहां न पानी है और न ही कोई पेड़-पौधे और जानवर है। बेहद गर्म हवाएं चलती हैं और सूखा होने के कारण खेती नहीं हो सकती है। साथ ही इस स्थान का तापमान साल के अधिकांश समय में 40 डिग्री से अधिक रहता है। यही कारण है कि यहां रहना किसी के लिए बहुत मुश्किल है।
भले ही बिर ताविल इलाका लावारिस की तरह है, क्योंकि इस पर कोई देश अपना हक नहीं जमाना चाहता, लेकिन फिर भी यह दुनिया के लिए खास है, क्योंकि यह इलाका बताता है कि जमीन की कीमत केवल उसके आकार पर नहीं बल्कि उसके संसाधनों और महत्व को तय होती है।
जहां दुनिया में जमीन के एक इंच के लिए लड़ाई होती हैं, वहां बीर ताविल एक ऐसा अपवाद है, जिस पर कोई हक नहीं जताना चाहता। नाम होते हुए भी यह इलाका एक बेनाम इलाका बना हुआ है।