एयरप्लेन में हॉर्न होता है और इसकी आवाज सड़क पर चलती किसी गाड़ी जैसी ही होती है। लेकिन इस हॉर्न का काम गाड़ी से बिल्कुल अलग होता है। ये ट्रैफिक में इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि एयरप्लेन के हॉर्न का काम एकदम अलग है।
असल में विमानों में हॉर्न या फिर अलार्म सिस्टम होता है। अब अगर आप सोच रहे होंगे कि क्या हवा में इसका इस्तेमाल करने के लिए इसे हवाई जहाज में फिट किया गया है, तो जवाब है नहीं। एयरप्लेन का हॉर्न हवा में दूसरे विमान को चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल नहीं होता बल्कि इसे जमीन पर इस्तेमाल किया जाता है।
आपने प्लेन में बैठते हुए कई बार टेकऑफ से पहले हॉर्न की आवाज सुनी होगी। हालांकि जरूरी नहीं कि हर बार ये बजाया जाए। लेकिन कई बार प्लेन में पायलट हॉर्न बजाता है।
हालांकि ज्यादातर कमर्शियल एयरक्राफ्ट जैसे कि Boeing 737 या फिर Airbus A 320 में कार जैसा हॉर्न नहीं होता। लेकिन कुछ विमानों में हॉर्न सिस्टम होता है और ये गाड़ी के हॉर्न से बिल्कुल अलग होता है।
हवाई जहाज के हॉर्न का मुख्य मकसद ग्राउंड क्रू के लोगों का ध्यान खींचना होता है, जो प्लेन के आसपास काम कर रहे होते हैं। साथ ही ये हॉर्न मेंटेनेंस अलर्ट के लिए भी इस्तेमाल किये जाते हैं। अकसर टेक्नीशियन कॉकपिट के अंदर मेंटेनेंस करते समय भी हॉर्न का इस्तेमाल करते हैं।
ये हॉर्न सिस्टम फेलियर वॉर्निंग के लिए भी इस्तेमाल होता है। कई बार हॉर्न ऑक्सिलरी पावर यूनिट (APU) में आग लगने या फिर एवियोनिक्स के ज्यादा ही गर्म हो जाने पर भी अलर्ट करने का काम करता है।
सड़कों पर चल रही गाड़ियों की तरह आसमान में प्लेन हॉर्न नहीं बजाते। ऐसा नहीं है कि वहां ट्रैफिक नहीं होता। एक दिन में हजारों प्लेन उड़ते हैं और ये रडार के जरिये अपना रास्ता तय करते हैं। हवा में हॉर्न के जरिये दूसरे प्लेन तक आवाज पहुंचाना पॉसिबल नहीं है। ऐसे में रडार कम्यूनिकेशन का इस्तेमाल होता है।