Digital Gold पर निवेश करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी, नुकसान से बचना हैं तो जान लें SEBI का अलर्ट

Digital Gold SEBI advisory: अगर आप डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं या फिर करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है। SEBI की तरफ से हाल ही में डिजिटल गोल्ड को लेकर एक बड़ी एडवाइजरी जारी की गई है। आइए आपको बताते हैं कि आखिर इस एडवाइजरी का मकसद क्या है और आपको डिजिटल गोल्ड पर निवेश करना चाहिए या नहीं?

Authored by: गौरव तिवारीUpdated Nov 12 2025, 17:33 IST
​भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI ) ने देशभर के निवेशकों को डिजिटल गोल्ड में निवेश करने को लेकर अलर्ट जारी किया है। सेबी ने कहा कि ये निवेश उत्पाद, सेबी-रेगुलेटेड नहीं हैं। यानी अगर किसी निवेशक के साथ डिजिटल गोल्ड में निवेश के बाद धोखाधड़ी होती है तो सेबी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा। सेबी के इस अलर्ट के बाद बहुत सारे डिजिटल गोल्ड निवेशक असमंजस में हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वे डिजिटल गोल्ड में किए अपने निवेश को तुरंत निकाल लें या बने रहें?Image Credit : IStock01 / 09

​भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (SEBI ) ने देशभर के निवेशकों को डिजिटल गोल्ड में निवेश करने को लेकर अलर्ट जारी किया है। सेबी ने कहा कि ये निवेश उत्पाद, सेबी-रेगुलेटेड नहीं हैं। यानी अगर किसी निवेशक के साथ डिजिटल गोल्ड में निवेश के बाद धोखाधड़ी होती है तो सेबी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाएगा। सेबी के इस अलर्ट के बाद बहुत सारे डिजिटल गोल्ड निवेशक असमंजस में हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वे डिजिटल गोल्ड में किए अपने निवेश को तुरंत निकाल लें या बने रहें?

​अगर आप भी उन निवेशकों में शामिल हैं, जिन्होंने डिजिटल गोल्ड में निवेश किया और अब क्या करना है, यह समझ में नहीं आ रहा है तो परेशान होने की जरूरत नहीं। हम आपको इस मुद्दे पर एक्सपर्ट की राय बता रहे हैं। इसके बाद आपके लिए फैसला लेना आसान हो जाएगा।Image Credit : IStock02 / 09

​अगर आप भी उन निवेशकों में शामिल हैं, जिन्होंने डिजिटल गोल्ड में निवेश किया और अब क्या करना है, यह समझ में नहीं आ रहा है तो परेशान होने की जरूरत नहीं। हम आपको इस मुद्दे पर एक्सपर्ट की राय बता रहे हैं। इसके बाद आपके लिए फैसला लेना आसान हो जाएगा।

​सेबी ने क्या एडवाइजरी जारी की? सेबी ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि कुछ डिजिटल/ऑनलाइन प्लेटफॉर्म निवेशकों को 'डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड उत्पादों' में निवेश करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड यानी सोने के सिक्के या ज्वैलरी के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। हम निवेशकों को बताते हैं कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद, सेबी के अंतर्गत रेगुलेटेड नहीं है। Image Credit : IStock03 / 09

​सेबी ने क्या एडवाइजरी जारी की? सेबी ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि कुछ डिजिटल/ऑनलाइन प्लेटफॉर्म निवेशकों को 'डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड उत्पादों' में निवेश करने का प्रस्ताव दे रहे हैं। डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड यानी सोने के सिक्के या ज्वैलरी के विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। हम निवेशकों को बताते हैं कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद, सेबी के अंतर्गत रेगुलेटेड नहीं है।

​डिजिटल गोल्ड को सेबी द्वारा न तो इक्विटी न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के रूप में रेगुलेट किया जाता है। ये पूरी तरह से सेबी के दायरे से बाहर हैं। ऐसे में अगर किसी निवेशक के साथ धोखाधड़ी होती है तो सेबी के पास उस कंपनी या व्यक्ति पर कार्रवाई करने का अधिका नहीं होगा। ऐसे में इसमें निवेश करना बहुत ही जोखिम भरा है।Image Credit : IStock04 / 09

​डिजिटल गोल्ड को सेबी द्वारा न तो इक्विटी न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के रूप में रेगुलेट किया जाता है। ये पूरी तरह से सेबी के दायरे से बाहर हैं। ऐसे में अगर किसी निवेशक के साथ धोखाधड़ी होती है तो सेबी के पास उस कंपनी या व्यक्ति पर कार्रवाई करने का अधिका नहीं होगा। ऐसे में इसमें निवेश करना बहुत ही जोखिम भरा है।

<strong>​डिजिटल गोल्ड में जोखिम क्या है?:</strong> केडिया कैपिटल सर्विसेज के फाउंडर और निदेशक, अजय केडिया ने कहा कि सेबी के इस अलर्ट के बड़े मायने हैं। सेबी ने साफ कर दिया है कि अगर कोई निवेशक डिजिटल गोल्ड में निवेश करता है और उसके साथ धोखाधड़ी हो जाती है तो सेबी के पास कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होगा। Image Credit : IStock05 / 09

​डिजिटल गोल्ड में जोखिम क्या है?: केडिया कैपिटल सर्विसेज के फाउंडर और निदेशक, अजय केडिया ने कहा कि सेबी के इस अलर्ट के बड़े मायने हैं। सेबी ने साफ कर दिया है कि अगर कोई निवेशक डिजिटल गोल्ड में निवेश करता है और उसके साथ धोखाधड़ी हो जाती है तो सेबी के पास कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होगा।

​इसको ऐसे समझते हैं कि अगर कोई ज्वैलर्स डिजिटल गोल्ड स्कीम में किसी निवेशक से मंथली निवेश करा रहा है। उस ज्वैलर्स ने 12 महीने बाद सोने के गहने देने का वादा किया है लेकिन 12वें महीने में वह ज्वैलर्स गहने देने से मना कर देता है या भाग जाता है तो सेबी के पास उस ज्वैलर्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकर नहीं होगा। ऐसे हालात में निवेश के पास सिर्फ पुलिस शिकायत करने का रास्ता बचेगा। यानी इस तरह के स्कीम में बहुत ज्यादा जोखिम है।Image Credit : IStock06 / 09

​इसको ऐसे समझते हैं कि अगर कोई ज्वैलर्स डिजिटल गोल्ड स्कीम में किसी निवेशक से मंथली निवेश करा रहा है। उस ज्वैलर्स ने 12 महीने बाद सोने के गहने देने का वादा किया है लेकिन 12वें महीने में वह ज्वैलर्स गहने देने से मना कर देता है या भाग जाता है तो सेबी के पास उस ज्वैलर्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकर नहीं होगा। ऐसे हालात में निवेश के पास सिर्फ पुलिस शिकायत करने का रास्ता बचेगा। यानी इस तरह के स्कीम में बहुत ज्यादा जोखिम है।

​निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत: एक्सपर्ट का कहना है कि फिनटेक ऐप्स, वॉलेट्स या अन्य गैर-सेबी-विनियमित प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड रखने या खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को इस आदेश के बाद सावधान रहने की आवश्यकता है। SEBI की हालिया एडवाइजरी का मकसद घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि निवेशकों को जागरूक करना है ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनका पैसा जवाबदेह और विश्वसनीय संस्थानों में ही निवेशित है।Image Credit : IStock07 / 09

​निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत: एक्सपर्ट का कहना है कि फिनटेक ऐप्स, वॉलेट्स या अन्य गैर-सेबी-विनियमित प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड रखने या खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को इस आदेश के बाद सावधान रहने की आवश्यकता है। SEBI की हालिया एडवाइजरी का मकसद घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि निवेशकों को जागरूक करना है ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनका पैसा जवाबदेह और विश्वसनीय संस्थानों में ही निवेशित है।

<strong>​निवेश को बनाए रखें या निकाल लें?: </strong>अजय केडिया कहते हैं कि चूंकि डिजिटल गोल्ड रेगुलेटेड नहीं है, इसलिए विनियमित स्वर्ण उत्पादों की तुलना में इसे जोखिम ज्यादा है। फिजिकल गोल्ड की उपलब्धता और वितरण से जुड़ा हालिया संकट और फिजिकल गोल्ड और स्वर्ण वायदा के बीच कीमतों का बेमेल होना भी अत्यधिक अस्थिरता के दौर में छिपे हुए जोखिम की ओर इशारा करता है। ऐसे में अगर आप अपना निवेश जारी रखना चाहते हैं तो आपको ज्यादा समझदारी से काम लेने और ऐसे प्लेटफॉर्म का चयन करना चाहिए जो विश्वसनीय, पारदर्शी और विश्वसनीय ज्वैलर्स द्वारा समर्थित हों।Image Credit : IStock08 / 09

​निवेश को बनाए रखें या निकाल लें?: अजय केडिया कहते हैं कि चूंकि डिजिटल गोल्ड रेगुलेटेड नहीं है, इसलिए विनियमित स्वर्ण उत्पादों की तुलना में इसे जोखिम ज्यादा है। फिजिकल गोल्ड की उपलब्धता और वितरण से जुड़ा हालिया संकट और फिजिकल गोल्ड और स्वर्ण वायदा के बीच कीमतों का बेमेल होना भी अत्यधिक अस्थिरता के दौर में छिपे हुए जोखिम की ओर इशारा करता है। ऐसे में अगर आप अपना निवेश जारी रखना चाहते हैं तो आपको ज्यादा समझदारी से काम लेने और ऐसे प्लेटफॉर्म का चयन करना चाहिए जो विश्वसनीय, पारदर्शी और विश्वसनीय ज्वैलर्स द्वारा समर्थित हों।

<strong>​घबराने या अचानक रिडेम्पशन नहीं करें:</strong> घबराने या अचानक रिडेम्पशन की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि उन्होंने अपना डिजिटल गोल्ड कहां से खरीदा है। अगर यह किसी प्रतिष्ठित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म से है, तो वे पूरे विश्वास के साथ इसे जारी रख सकते हैं। सेबी का संदेश मूलतः जागरूकता के बारे में है, जिसमें ग्राहकों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाता है कि उनका निवेश जवाबदेह और विश्वसनीय संस्थानों के पास हो।Image Credit : IStock09 / 09

​घबराने या अचानक रिडेम्पशन नहीं करें: घबराने या अचानक रिडेम्पशन की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि निवेशकों को यह देखना चाहिए कि उन्होंने अपना डिजिटल गोल्ड कहां से खरीदा है। अगर यह किसी प्रतिष्ठित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म से है, तो वे पूरे विश्वास के साथ इसे जारी रख सकते हैं। सेबी का संदेश मूलतः जागरूकता के बारे में है, जिसमें ग्राहकों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाता है कि उनका निवेश जवाबदेह और विश्वसनीय संस्थानों के पास हो।

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