वेतन छोड़ने से पहले मुकेश अंबानी ने अपने पारिश्रमिक को सीमित रखा था। वे 2008-09 से 2019-20 तक हर साल करीब 15 करोड़ रुपये वेतन के रूप में लेते थे। हालांकि, कोविड-19 महामारी के समय उन्होंने यह निर्णय लिया कि वे तब तक वेतन नहीं लेंगे जब तक कंपनी अपने पूरी क्षमता के साथ सामान्य स्थिति में वापस नहीं आ जाती।
मुकेश अंबानी ने यह फैसला महामारी के दौरान कंपनी और अर्थव्यवस्था पर पड़े प्रभाव को देखते हुए लिया था। उनका मानना था कि ऐसे समय में जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है, तब नेतृत्व को उदाहरण पेश करना चाहिए। इसलिए उन्होंने अपने वेतन को स्वेच्छा से त्याग दिया और बाद के वर्षों में भी इस फैसले को जारी रखा।
वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अब तक का सबसे बड़ा मुनाफा कमाया, जो करीब 95,754 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का बाजार मूल्य भी करीब 18.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे यह साफ है कि कंपनी लगातार मजबूत वित्तीय प्रदर्शन कर रही है और भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है।
भले ही मुकेश अंबानी वेतन नहीं लेते, लेकिन उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा लाभांश (डिविडेंड) से आता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी करीब 1.61 करोड़ शेयरों की हिस्सेदारी है। इन शेयरों पर मिलने वाले लाभांश से उन्हें नियमित आय प्राप्त होती है। उदाहरण के तौर पर, वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति शेयर 6 रुपये लाभांश के हिसाब से उन्हें लगभग 9.66 करोड़ रुपये की आय हुई।
रिलायंस के अन्य शीर्ष अधिकारियों को नियमित वेतन मिलता है। मुकेश अंबानी के चचेरे भाई निखिल और हितल मेसवानी का पारिश्रमिक लगभग 25-25 करोड़ रुपये पर स्थिर रहा है, जिसमें वेतन, भत्ते और कमीशन शामिल हैं। वहीं, कार्यकारी निदेशक पी. एम. एस. प्रसाद का वेतन बढ़कर 20.58 करोड़ रुपये हो गया है।
मुकेश अंबानी के बच्चे ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी को अक्टूबर 2023 में कंपनी के बोर्ड में शामिल किया गया था। हालांकि, उन्हें कोई नियमित वेतन नहीं मिलता। उन्हें केवल बैठक शुल्क और प्रदर्शन आधारित कमीशन दिया जाता है। आकाश और ईशा को बैठक शुल्क के रूप में 5-5 लाख रुपये और 2.5-2.5 करोड़ रुपये कमीशन मिला है।
मुकेश अंबानी 1977 से रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में जुड़े हुए हैं और जुलाई 2002 में अपने पिता धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद कंपनी के चेयरमैन बने। वर्ष 2023 में उन्हें 2029 तक फिर से पांच साल के लिए चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इस अवधि में भी उन्होंने वेतन न लेने का फैसला जारी रखा है, जबकि उनकी आय का मुख्य आधार कंपनी के शेयरों पर मिलने वाला लाभांश और उनकी हिस्सेदारी बनी हुई है।