मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश में आम की 800 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। इनमें दशहरी, लंगड़ा, रतोल और आम्रपाली जैसी प्रसिद्ध किस्में शामिल हैं। ये किस्में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों जैसे मलिहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर, बागपत, सहारनपुर और बस्ती की पहचान बन चुकी हैं।
योगी आदित्यनाथ ने आम की विविधता को उत्तर प्रदेश की बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि हर आम की किस्म अपनी मिट्टी की खुशबू और अपने क्षेत्र की मिठास को दर्शाती है। यह विविधता राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान दिलाती है।
मुख्यमंत्री ने आम खेती की आर्थिक संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक एकड़ आम की खेती से किसान लगभग 2.5 लाख रुपये की शुद्ध आय कमा सकता है। यदि इसे मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग और निर्यात से जोड़ा जाए, तो किसानों की आमदनी और भी बढ़ सकती है।
लखनऊ में आयोजित आम महोत्सव-2026 को किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया गया। इस महोत्सव में किसान अपनी उपज प्रदर्शित करते हैं और खरीदारों से सीधे जुड़ते हैं। इससे उन्हें अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि मलिहाबाद के दशहरी आम को भौगोलिक संकेत (GI टैग) मिल चुका है, जिससे इसे वैश्विक पहचान मिली है। इसके अलावा राज्य सरकार ने ‘काकोरी’ ब्रांड के तहत भी आम की ब्रांडिंग शुरू की है, जिसका नाम स्वतंत्रता सेनानियों की याद में रखा गया है।
उत्तर प्रदेश ने सहारनपुर, लखनऊ, अमरोहा और वाराणसी में चार आधुनिक आम पैक हाउस स्थापित किए हैं। यहां आम की ग्रेडिंग, छंटाई और पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध है। इससे आम की गुणवत्ता बेहतर हुई है और निर्यात को बढ़ावा मिला है।
आज उत्तर प्रदेश का आम ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे कई देशों में निर्यात किया जा रहा है। 2017 के बाद से आम महोत्सव ने किसानों, वैज्ञानिकों और निर्यातकों को एक साझा मंच दिया है, जिससे कृषि और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिला है।