Gold-Silver ETF ने दिया जोर का झटका, 40% की ऐतिहासिक गिरावट से निवेशक पस्त, जानें अब क्‍या करें?

Gold-Silver ETF: सोना और चांदी आधारित एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने निवेशकों को जोर का झटका दिया है। इन ETFs में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जो MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में कमी के साथ जुड़ी हुई। निवेशक इस समय मध्यपूर्व संकट और अमेरिका की फेडरल रिजर्व की आगामी नीति निर्णय को लेकर सतर्क हैं। यहां जानिए निवेश क्या करें।

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Mar 18 2026, 13:14 IST
​जनवरी से निवेशक फंसे​Image Credit : Istock01 / 07

​जनवरी से निवेशक फंसे​

कुछ महीने पहले गोल्ड-सिल्वर की चर्चा हर जगह थी। निवेशक बड़े पैमाने पर इन ETFs में पैसा लगा रहे थे। जनवरी में खरीदी गई ETFs में अब तक 40% तक गिरावट देखी गई है। निवेशकों को उम्मीद थी कि ईरान-अमेरिका के बीच संकट से सोने और चांदी में तेजी आएगी, लेकिन इसके उलट कीमतों में गिरावट आई।

​ETFs में भारी गिरावट​Image Credit : Istock02 / 07

​ETFs में भारी गिरावट​

HDFC Silver ETF बुधवार (18 मार्च 2026) को सबसे ज्यादा गिरा, जो पिछले बंद मूल्य Rs 241.61 से घटकर Rs 233.14 पर आ गया। अन्य सिल्वर ETFs 2% से 3% तक नीचे आए। गोल्ड ETFs में Aditya Birla Sun Life Gold ETF सबसे अधिक गिरा, करीब 3%, जबकि अन्य गोल्ड ETFs में 1%–2% की गिरावट रही।

​MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल​Image Credit : Istock03 / 07

​MCX और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल​

MCX पर मई 2026 की सिल्वर फ्यूचर्स Rs 2,51,118 प्रति किलो पर 0.8% गिर गई, वहीं अप्रैल 2026 की गोल्ड फ्यूचर्स Rs 1,55,649 प्रति 10 ग्राम पर 0.2% नीचे आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, स्पॉट गोल्ड $5,000.77 प्रति औंस और स्पॉट सिल्वर $79 प्रति औंस पर मामूली गिरावट के साथ स्थिर रही।

​फेडरल रिजर्व की नीति पर निर्भर भविष्य​Image Credit : Istock04 / 07

​फेडरल रिजर्व की नीति पर निर्भर भविष्य​

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों की दिशा फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर निर्भर करेगी। अगर रिजर्व इस साल ब्याज दर में कटौती करता है, तो सोने और चांदी में तेजी देखी जा सकती है। वहीं, अगर ब्याज दर स्थिर रखी जाती है, तो मेटल्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

​गिरावट के पीछे वजहें​Image Credit : Istock05 / 07

​गिरावट के पीछे वजहें​

विशेषज्ञों का मानना है कि सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण डॉलर में मजबूती और वैश्विक अस्थिरता है। फरवरी 2026 में सिल्वर ETF में 28 महीने बाद निवेशकों ने पैसा निकालना शुरू किया। इस दौरान करीब 826 करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज हुआ। निवेशकों ने मुनाफा बुकिंग और पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के चलते पैसा निकाला। गोल्ड ETFs में भी निवेश का रफ्तार धीमा हो गया। AMFI के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में गोल्ड ETFs में 5,255 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो जनवरी के 24,039.96 करोड़ रुपये के मुकाबले 78% कम था।

​पैसिव फंड्स और अन्य कैटेगरी का हाल​Image Credit : Istock06 / 07

​पैसिव फंड्स और अन्य कैटेगरी का हाल​

फरवरी में इंडेक्स फंड, ETFs और फंड ऑफ फंड्स जैसी पैसिव कैटेगरी में कुल 13,879 करोड़ रुपये का निवेश आया। यह जनवरी में 39,954 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले काफी कम है। हालांकि, इंडेक्स फंड में 3,233 करोड़, अन्य ETFs में 4,487 करोड़ और विदेशी फंड में 904 करोड़ रुपये का निवेश जारी रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थिरता और वैश्विक घटनाओं के बीच निवेशकों के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है। गिरावट के बावजूद गोल्ड और सिल्वर में लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है।

​अब क्या करें निवेशक?​Image Credit : Istock07 / 07

​अब क्या करें निवेशक?​

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल की गिरावट असल में एक ओवरबॉट मार्केट की कूलिंग है, न कि लंबी अवधि का रुझान बदलना। हालांकि, चांदी में हालिया तेजी के चलते जोखिम थोड़ा अधिक है, इसलिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में सोने और चांदी का संतुलन बनाए रखना चाहिए। फंड मैनेजर्स फिलहाल सोने को चांदी की तुलना में बेहतर जोखिम-रिटर्न विकल्प मान रहे हैं और निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दे रहे हैं।

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